
अंतरिक्ष में अद्भुत खगोलीय घटना चंद्र ग्रहण को लोगों ने उत्सुकता के साथ देखा। जैसे-जैसे रात गहरा रही थी, लोगों में उत्साह बढ़ रहा था। बादलों के बावजूद लोग पूर्ण चंद्रग्रहण को जिज्ञासा के साथ देख रहे थे।

2/20दिल्ली में भी लोगों ने अपनी कोरी आंखों से इस अनोखे खगोलीय हेर-फेर को देखा। दिल्ली में चांद अलग-अलग रंग में नजर आया। लेकिन, लोगों को सबसे अधिक आकर्षित लाल रंग ने किया। दिल्ली में ब्लड मून का बेहतरीन नजारा दिखाई दिया।

3/20दिल्ली में लोग पहले से ही चंद्र ग्रहण को देखने के लिए तैयार दिखे। कोई परिवार के साथ तो कोई दोस्तों के साथ इसे देख रहा था। चंद्रग्रहण देखने के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) में स्थित नेहरू तारामंडल ने भव्य चंद्र कार्निवल का आयोजन किया।

4/20कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं को नुक्कड़ नाटक के जरिए उन्हें खगोलीय घटना के बारे में बताया गया। इसका उद्देश्य खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों, युवाओं और छात्रों को एक साथ लाकर चंद्रमा को गहरे लाल रंग में बदलते देखना था, जिसे ब्लड मून कहा गया।

5/20दिल्ली में ग्रहण रविवार रात को प्रारंभ 8 बजकर 58 मिनट पर शुरू हुआ। पूर्णता चांद 11 बजकर 41 मिनट पर रहा। वहीं, समाप्त रात 2 बजकर 25 मिनट में हुआ। ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे, 27 मिनट रही।

6/20दिल्ली में ब्लड मून का नजारा अलग-अलग दिखा। कभी चांद पूरी तरह सुर्ख लाल तो कभी उसका कुछ हिस्सा लाल नजर आया।

7/20चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है। यह तब होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इससे चंद्रमा पर छाया पड़ती है। इस दौरान तीनों खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में होते हैं।

8/20दिल्ली में एक समय ऐसा आया जब जांच सुर्ख लाल रंग के साथ अंधेरे की आगोश में समाता नजर आया। हालांकि जैसे जैसे चंद्र ग्रहण समाप्त होता गया। चंद अपने चांदनी रंग में दिखने लगा।

9/20पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, रात 11:01 बजे पृथ्वी की छाया ने चंद्रमा को पूरी तरह से ढक लिया। इससे चंद्रमा का रंग तांबे जैसा लाल हो गया और पूर्ण चंद्रग्रहण का दुर्लभ नजारा देखने को मिला।

10/20खगोल विज्ञानियों की मानें तो सूर्य ग्रहण को देखने के लिए विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है क्योंकि सूर्य की खतरनाक किरणों से आंखें प्रभावित होने का खतरा रहता है। हालांकि सूर्य ग्रहण के उलट पूर्ण चंद्र ग्रहण को देखने के लिए विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

11/20चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे उसकी छाया चंद्र सतह पर पड़ती है। अगला पूर्ण चंद्रग्रहण देश में 31 दिसंबर 2028 को दिखाई देगा। (पीटीआई-भाषा)

12/20पीटीआई के मुताबिक, रविवार को नजर आने वाला ग्रहण 2022 के बाद से भारत में दिखाई देने वाला सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण था।

13/20पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्ण चंद्रग्रहण पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में दिखाई दिया।

14/20पीटीआई के मुताबिक, यह ग्रहण 27 जुलाई 2018 के बाद से देश के सभी हिस्सों से देखा जाने वाला पहला चंद्रग्रहण था।

15/20जवाहरलाल नेहरू तारामंडल के पूर्व निदेशक बीएस शैलजा ने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल दिखाई देता है क्योंकि उस तक पहुंचने वाला सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से परावर्तित होकर फैल जाता है। (पीटीआई-भाषा)

16/20भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने पूर्ण चंद्रग्रहण की प्रक्रिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधे प्रसारित किया। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने बेंगलुरु, लद्दाख और तमिलनाडु में स्थित अपने परिसरों में लगीं दूरबीनों को चंद्रमा पर टिकाए रखा।

17/20देश के कई भागों में बादलों से पटे आसमान ने खेल बिगाड़ दिया लेकिन दुनिया भर में खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों की ओर से आयोजित लाइव स्ट्रीम ने लोगों की निराशा को दूर कर दिया।

18/20चंद्र ग्रहण से कई मिथ भी जुड़े हैं। लोग नकारात्मक ऊर्जा के डर से भोजन, पानी और शारीरिक गतिविधियों से परहेज करते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ग्रहण गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों के लिए हानिकारक होते हैं।

19/20वहीं खगोलविदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना है। इसे भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट के समय से बहुत पहले ही समझ लिया गया था। खगोलविदों का साफ कहना है कि इससे लोगों या जानवरों को कोई खतरा नहीं होता है।

20/20दिल्ली में युवाओं और छात्रों को खगोलीय घटना के बारे में विस्तार से बताया गया। लोगों ने टेलीस्कोप के माध्यम से ग्रहण का सीधा दृश्य देखा। टेलीस्कोप से चंद्र ग्रहण देखने के लिए लोग बारी-बारी से अपना इंतजार कर रहे थे। इससे पृथ्वी की छाया से गुजरते हुए चंद्रमा का नजदीक से देखा।
