
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस फोन को आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वही फोन आपको भी लगातार 'ऑब्जर्व' कर रहा है और आप पर नजर रखता है? दरअसल, स्मार्टफोन आपकी आदतों, लोकेशन, पसंद-नापसंद और रोजमर्रा की ऐक्टिविटीज का डाटा भी इकट्ठा करता रहता है। कई बार यह ट्रैकिंग आपके एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए होती है, लेकिन अक्सर यूजर्स को इसकी जानकारी नहीं होती।

2/8आप जहां जाते हैं, आपका फोन अक्सर उसकी हिस्ट्री सेव करता रहता है। मैप्स, राइड ऐप्स और सोशल मीडिया ऐप्स लगातार लोकेशन डाटा रिकॉर्ड करते हैं। यही वजह है कि कई बार फोन आपको बिना सर्च किए आसपास के रेस्तरां या अन्य जगहों के बारे में दिखाने लगता है।

3/8आप इंटरनेट पर क्या सर्च करते हैं, किस वेबसाइट पर जाते हैं और कितनी देर रुकते हैं, यह सारा डाटा ट्रैक किया जाता है। इसी डाटा की मदद से आपको पर्सनलाइज्ड ऐड दिखाए जाते हैं। यानी अगर आपने जूते सर्च किए और कुछ देर बाद हर ऐप में जूतों के ऐड दिखने लगते हैं।

4/8फोन यह भी रिकॉर्ड करता है कि आप कौन-सा ऐप कितनी देर इस्तेमाल करते हैं। यह डाटा डिजिटल वेलबीइंग फीचर और स्क्रीन टाइम रिपोर्ट में दिखता है, लेकिन बैकग्राउंड में ऐप कंपनियां यूजर बिहेवियर समझने के लिए भी इसका इस्तेमाल करती हैं।

5/8जब आप वॉइस असिस्टेंट इस्तेमाल करते हैं, तो माइक्रोफोन एक्टिव रहता है। कुछ ऐप्स परमिशन मिलने के बाद ऑडियो डाटा एक्सेस कर सकते हैं। यही वजह है कि कई लोगों को लगता है कि फोन उनकी बातचीत से जुड़े एडवर्टाइजमेंट्स दिखा रहा है।

6/8फोन के सेंसर आपकी चाल, कदमों की संख्या, दौड़ने या चलने की एक्टिविटी तक रिकॉर्ड कर सकते हैं। हेल्थ और फिटनेस ऐप्स इसी डाटा से आपकी डेली एक्टिविटी रिपोर्ट तैयार करते हैं।

7/8आप ऑनलाइन क्या खरीदते हैं, किस कीमत के प्रोडक्ट देखते हैं और किस तरह पेमेंट करते हैं, यह जानकारी भी सिस्टम सीखता रहता है। इसी वजह से ई-कॉमर्स ऐप्स आपको आपकी पसंद के ऑफर और प्रोडक्ट दिखाते हैं।

8/8कैमरा ऐप और क्लाउड सर्विसेज फोटो में मौजूद चेहरे, लोकेशन और ऑब्जेक्ट तक पहचानी जा सकती हैं। इससे फोटो ऑटोमैटिकली People, Trips या Events के टैग के साथ मैनेज हो पाती हैं।
