तहव्वुर राणा की साजिश और आग की लपटों में घिर गई थी मुंबई, तस्वीरों में देखें 26/11 का मंजर

  • 26 नवंबर, 2008 की तारीख कोई भारतीय नहीं भूल सकता। सिर्फ एक नहीं पूरे 4 दिनों तक आतंकवादियों ने मुंबई के सीने पर बड़े जख्म दिए थे। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के दहशतगर्दों ने भारत में आकर ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया और 150 से ज्यादा लोगों की जान ले ली।

Nisarg DixitApr 10, 2025 08:24 am IST
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आतंकियों ने यहां बरपाया कहर

26/11 के हमले के दौरान आतंकवादियों ने ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल के अलावा छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, लिटोपोल्ड कैफे, मुंबई छाबड़ हाउस, नरीमन हाउस, कामा अस्पताल और मैट्रो सिनेमा को निशाना बनाया था। इस दौरान 300 लोग घायल हुए और 166 लोगों की मौत हो गई थी।

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कैसे भारत पहुंचे आतंकवादी

मुंबई में हमला करने वाले आतंकवादी पहले पाकिस्तानी नाव में चढ़े और बाद में मछुआरों की नाव पर कब्जा किया और उसके सदस्यों की हत्या कर दी। इसके बाद वो ससून डॉक्स और बाधवार पार्क पहुंचे। ये गेटवे ऑफ इंडिया के पास हैं। मुंबई में दाखिल होने के बाद आतंकवादी अलग-अलग स्थानों पर हमला करने के लिए छोटे हिस्सों में बंट गए।

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हमले के 3 साल पहले रची गई थी साजिश

राणा 2005 में 26/11 मुंबई हमलों की साजिश का हिस्सा बन गया था। वह पाकिस्तान स्थित साजिशकर्ताओं के साथ निकटता से जुड़ा हुआ था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, लश्कर ए तैयबा और हरकत उल जिहाद अल इस्लामी के सदस्य राणा ने पाकिस्तान स्थित अन्य सह-साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर 2005 की शुरुआत में मुंबई हमलों को अंजाम देने के लिए साजिश रची थी।

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राणा और हेडली

आतंकवादी डेविड हेडली जून 2006 में अमेरिका गया था और राणा से मिला था, जहां उन्होंने हमले के संबंध में चर्चा की थी। राणा ने ही आतंकी हेडली को भारत के लिए वीजा दिलाने में मदद की थी और मुंबई में ‘इमिग्रेंट लॉ सेंटर की स्थापना की थी, जो एक मुखौटा संगठन के रूप में काम करता था।

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लंबी बातचीत

अधिकारियों ने बताया, भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान हेडली ने राणा से 32 से ज्यादा बार फोन पर बात की थी। इसके बाद, हेडली ने अपनी दूसरी यात्रा के दौरान राणा से 23 बार, तीसरी यात्रा के दौरान 40 बार, पांचवीं यात्रा के दौरान 37 बार, छठी यात्रा के दौरान 33 बार और आठवीं यात्रा के दौरान 66 बार बात की।

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आमिर अजमल कसाब

इस हमले के बीच आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को पकड़ने में सफलता मिली थी। नवंबर 2012 में, पाकिस्तानी समूह के एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दे दी गई थी।

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राणा और इकबाल

तहव्वुर राणा 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले के एक अन्य सह-साजिशकर्ता मेजर इकबाल के संपर्क में रहा। तहव्वुर राणा ने 13 नवंबर से 21 नवंबर 2008 के बीच अपनी पत्नी समराज राणा अख्तर के साथ हापुड़, दिल्ली, आगरा, कोच्चि, अहमदाबाद और मुंबई की यात्रा की थी।

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कहां रहेगा राणा

गुरुवार को राणा को विशेष विमान से भारत लाया जा रहा है, जिसके बाद उसे तिहाड़ जेल में रखा जा सकता है। खास बात है कि उसे उस बैरक में रखा जा सकता है, जहां कसाब सजा काट रहा था। भारत की अलग-अलग एजेंसियों की टीम अमेरिका गई है और राणा को भारत लाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ सभी कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

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