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श्रद्धांजलि : स्वतंत्रता आंदोलन में नेता जी ने निभाई थी अहम भूमिका

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
subhash chandra bose
गुलामी की जंजीर में जकड़े भारत के सामने आजादी हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती का सामना करने लिए कई योद्धा तैयार हुए, उन्होंने अपनी कुर्बानी भी थी। इस फेहरिस्त में एक नाम बहुत ही फक्र से लिया जाता है। वो सख्स जिसने देश हित के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। हम बात कर रहे हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की। आज नेताजी की पुण्यतिथि है...
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नेताजी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक से प्राप्त की। वो उच्च शिक्षा के लिए वे कलकत्ता चले गए और वहां के अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे इण्डियन सिविल सर्विस (ICS) की तैयारी के लिए इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय चले गए। उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया।
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इसके बाद 1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों की बातें सुनकर नेताजी भारत लौट आए और उन्होंने सिविल सर्विस छोड़ दी। इसके बाद नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए था। यहां से उन्होंने भारत को आजाद कराने की मुहिम से जुड़े। इस वजह से उन्हें ब्रिटिश शासन काल में कई बार जेल जाना पड़ा। हालांकि वो किसी से डरे नहीं और अंत तक जुटे रहे।
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  • Web Title:subhash chandra bose Tribute played an important role in the freedom movement