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25 सितम्बर, 2020|10:43|IST

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PHOTOS: दुनियाभर में एक अमिट छाप छोड़कर गए प्रणब दा

photos  former president and congress veteran pranab mukherjee dies at 84
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन देशभर में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव में कहा, 'मंत्रिमंडल भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के दुखद निधन पर गहरा शोक प्रकट करता है। उनके निधन से देश ने एक विशिष्ट नेता एवं उत्कृष्ट सांसद को खो दिया। (Photo-HT Archive)

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मंत्रिमंडल ने कहा कि भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का प्रशासन में अतुलनीय अनुभव था जिन्होंने विदेश, रक्षा, वाणिज्य और वित्त मंत्री के रूप में देश की सेवा की।' (Photo-HT Archive)

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पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसम्बर 1935 को जन्मे प्रणब मुखर्जी को जीवन की आरंभिक सीख अपने स्वतंत्रता सेनानी माता-पिता से मिली। उनके पिता कांग्रेस के नेता थे, जिन्होंने बेहद आर्थिक संकटों का सामना किया। स्वाधीनता आंदोलन में अपनी भूमिका के लिए वह कई बार जेल भी गए। (Photo-HT Archive)

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मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रणब मुखर्जी ने अपने पेशेवर जीवन की शुरूआत कॉलेज के शिक्षक और एक पत्रकार के रूप में की। उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन 1969 में राज्यसभा के लिये निर्वाचित होने के साथ शुरू किया । उन्होंने 1973-75 के दौरान उद्योग, परिवहन, वित्त राज्यमंत्री का दायित्व भी संभाला। (Photo-HT Archive)

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प्रणब मुखर्जी 1982 में भारत के सबसे युवा वित्त मंत्री बने। तब वह 47 साल के थे। आगे चलकर उन्होंने विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त व वाणिज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। वह भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो इतने पदों को सुशोभित करते हुए इस शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुंचे थे। (Photo-HT Archive)

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प्रणब मुखर्जी भारत के एकमात्र ऐसे नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री पद पर न रहते हुए भी आठ वर्षों तक लोकसभा के नेता रहे। वह 1980 से 1985 के बीच राज्यसभा में भी कांग्रेस पार्टी के नेता रहे। अपने उल्लेखनीय राजनीतिक सफर में उन्होंने और भी कई उपलब्धियां हासिल कीं। (Photo-HT Archive)

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प्रणब मुखर्जी जब 2012 में देश के राष्ट्रपति बने तो उस समय वह केंद्र सरकार के मंत्री के तौर पर कुल 39 मंत्री समूहों में से 24 का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 2004 में शुरू हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के उथल-पुथल के वर्षों से लेकर 25 जुलाई 2012 को राष्ट्रपति बनने तक वह सरकार के संकटमोचक बने रहे। (Photo-HT Archive)

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राष्ट्रपति के रूप में भी प्रणब मुखर्जी ने एक अमिट छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने दया याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया। इस दौरान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनकी विद्वता और मानवीय गुणों की छाप देखने को मिली। उन्होंने अर्थव्यवस्था एवं राष्ट्र निर्माण पर कई पुस्तकें लिखी। (Photo-Rashtrapati Bhavan)

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