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बाइस्कोप: जब एनडीए की सरकार बनी, देखें यादगार चुनावी तस्वीरें

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3 मई 1996 को 11वीं लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव यूपी के अलीगढ़ में चुनावी सभा को संबोधित करते। मंच पर साथ हैं अमर सिंह। नतीजों की घोषणा के बाद किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। सबसे बड़ी पार्टी होने पर भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने मगर 13 दिन के बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1981 में अमेठी लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजीव गांधी ने पत्नी सोनिया के साथ चुनाव प्रचार किया। नतीजा राजीव के पक्ष में आया। 1980 में अमेठी से राजीव गांधी के बड़े भाई संजय गांधी को जीत हासिल हुई थी मगर, इसी साल के अंत में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु होने से अमेठी में उपचुनाव कराया गया था। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1998 में मीरा कुमार ने कांग्रेस की टिकट पर दिल्ली की करोल बाग संसदीय सीट से 12वीं लोकसभा चुनाव के लिए पर्चा भरा था। उन्होंने इस सीट से लगातार 2 बार जीत हासिल की। बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार 5 बार सांसद रहीं और देश की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष बनीं। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के अध्यक्ष अटल विहारी वाजपेयी दिल्ली में चुनावी सभा को संबोधित करते। इस चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा ने जोड़तोड़ कर सरकार बनाई लेकिन 17 अप्रैल 1999 को वाजपेयी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया और उनकी सरकार गिर गई। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1980 में सातवीं लोकसभा के चुनाव के दौरान हल्द्वानी के रामलीला मैदान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जनसभा को संबोधित करती हुईं। तब इंदिरा हर चुनावी सभा में लोगों से अपील करती थीं 'चुनिए उन्हें जो सरकार चला सकें'। इस चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी और नैनीताल से कांग्रेस (आई) उम्मीदवार नारायण दत्त तिवारी जीते थे। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1998 में 12वीं लोकसभा चुनाव के दौरान 30 जनवरी को यूनाइटेड फ्रंट के नेता शरद यादव, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, वामदलों के हरिकिशन सिंह सुरजीत व एबी वर्धन पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए। तब 16, 22, 28 फरवरी व 7 मार्च को चार चरणों में चुनाव हुए थे। चुनाव में तीन गठबंधन थे और किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉक्टर कर्ण सिंह 1988 में उधमपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान जम्मू-कश्मीर के बटोटे गांव में चुनाव प्रचार के दौरान एक ग्रामीण से उसकी मांग सुनते हुए। हालांकि तब उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था। डॉ. कर्ण सिंह ने इस क्षेत्र से कई बार चुनाव जीता है। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1971 में पांचवीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कृष्ण चंद्र पंत नैनीताल लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार मैदान में थे। तस्वीर में पंत (बीच में) खटीमा में तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष डॉ. केडी पांडे और समर्थकों के साथ प्रचार के लिए पदयात्रा करते दिख रहे हैं। पंत ने इस चुनाव में भी जीत दर्ज की थी। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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14 अप्रैल 1991: राष्ट्रीय मोर्चा का घोषणापत्र जारी करते हुए तेलगूदेशम पार्टी के अध्यक्ष एनटी रामाराव, विश्वनाथ प्रताप सिंह, सुरेंद्र मोहन, रामविलास पासवान और जयपाल रेड्डी। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद मध्य जून तक चुनाव स्थगित कर दिया गया था। बाद में कांग्रेस ने सहयोगी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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वर्ष 1978 में कर्नाटक के चिकमंगलूर से नामांकन दाखिल करतीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। आपातकाल के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में जनता पार्टी से न केवल कांग्रेस हारी बल्कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी रायबरेली में राजनारायण से शिकस्त मिली थी। लोकसभा में जाने के लिए बाद में वह कर्नाटक से उपचुनाव लड़ीं और जीत दर्ज की। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1984 में लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद में प्रचार करते कांग्रेस प्रत्याशी अमिताभ बच्चन। इस चुनाव में उनके सामने हेमवतीनंदन बहुगुणा थे। उस समय बहुगुणा को इलाहाबाद से हराना लगभग असंभव माना जाता था। लेकिन अमिताभ इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उठी सहानुभूति लहर पर सवार होकर मैदान में उतरे और लगभग 2 लाख मतों से जीते। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1996 में आम चुनाव की घोषणा के बाद तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष एलके आडवाणी ने 6 अप्रैल 1996 को दिल्ली की सातों सीटों के पार्टी प्रत्याशियों के साथ चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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रुद्रपुर में वर्ष 2004 में 14वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हेवीवेट उम्मीदवार केसी सिंह बाबा के समर्थन में जनसभा करने पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी। दो बार पावर लिफ्टिंग के नेशनल चैंपियन केसी बाबा ने यहां से 2004 और 2009 में चुनाव जीता था। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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यह तस्वीर 8 अप्रैल 1996 की है जब नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार जगमोहन ने प्रचार शुरू करने से पहले हवन-पूजन किया। 11वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में उन्होंने सिने अभिनेता राजेश खन्ना को मात दी थी। इससे पहले 1992 के उपचुनाव में राजेश खन्ना ने इसी सीट पर वरिष्ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी को हराया था। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1951-52 में पहली लोकसभा के लिए हुए चुनाव में दिल्ली में कांग्रेस ने कुछ इस तरह चुनाव प्रचार किया, आगे पार्टी के चुनाव चिन्ह बैलों की जोड़ी चल रही थी और उसके पीछे विदेशी विंटेज कार से प्रचार हो रहा था। यह चुनाव मौसम की विकट परिस्थितियों के कारण 68 चरणों में हुआ था। कुल 489 सीटों में से कांग्रेस ने 364 जीतीं और नेहरु पीएम चुने गए।(फोटो-हिन्दुस्तान)
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देश में पहली बार 1977 में गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ, जिसके सूत्रधार बने थे लोकनायक जय प्रकाश नारायण। 23 मार्च 1977 को जनता पार्टी की जीत के बाद जेपी जब नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनका स्वागत करते नेतागण। चित्र में आचार्य जेबी कृपलानी भी दिखाई दे रहे हैं। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1996 में आम चुनाव के दौरान 27 नवंबर को मिर्जापुर में चुनाव प्रचार करती फूलन देवी। सपा ने इस चुनाव में फूलन को पहली बार टिकट देकर मिर्जापुर से मैदान में उतारा था। चंबल के बीहड़ों में वर्षों तक रहने वाली फूलन ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद सपा ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव में फूलन इस सीट से विजय हुई थीं। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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हिन्दी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विनोद खन्ना 16 नवंबर 1998 को नई दिल्ली के आईटीओ पर एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए। तब वे भाजपा के स्टार प्रचारक थे। विनोद खन्ना 1998, 1999, 2004 और 2014 का लोकसभा चुनाव पंजाब के गुरदासपुर से जीता था। 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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11वीं लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव 4 मई 1996 को उत्तर प्रदेश के एटा में एक रैली के दौरान भीड़ का अभिवादन स्वीकार करते हुए। तब मुलायम सिंह यूपी की सियासत के केंद्र में थे। लोग नारा लगाते थे -जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है। इस चुनाव में सपा ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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12वीं लोकसभा के चुनाव में 1998 में 30 मार्च को एनडीए की जीत के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष एलके आडवाणी पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में एक-दूसरे को बधाई देते हुए। इस चुनाव में भाजपा 182 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1989 में 9वें लोकसभा चुनाव के दौरान देहरादून के चकरता में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ब्रह्मदत्त (पीछे) के लिए चुनावी सभा की। मंच पर राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी भी दिख रही हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मदत्त टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे और जीत दर्ज की थी। 1984 के चुनाव में भी वे ही सीट से विजयी हुए थे। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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आपातकाल के बाद मार्च 1977 में छठी लोकसभा के चुनावों की घोषणा करते तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टी स्वामीनाथन (बीच में)। इस चुनाव में देश में पहली बार गैर कांग्रेसी (जनता दल गठबंधन) सरकार का गठन हुआ और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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10वीं लोकसभा चुनाव (1991) के दौरान देहरादून के परेड ग्राउंड में चुनावी सभा के दौरान भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी से सलाह लेते स्थानीय नेता नरेंद्र स्वरूप मित्तल। वाजपेयी टिहरी सीट से प्रत्याशी मानवेंद्र शाह का प्रचार करने पहुंचे थे। चुनाव में मानवेंद्र ने ब्रह्मदत्त शर्मा को हराया था। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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जनता दल के शीर्ष नेता मार्च 1996 में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के दौरान। इस बैठक में आने वाले चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई थी। चित्र में एस जयपाल रेड्डी, इंद्र कुमार गुजराल, राम विलास पासवान, एचडी देवेगौड़ा, लालू प्रसाद यादव और रामकृष्ण हेगड़े आदि दिखाई दे रहे हैं। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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साल 1998 में 12वीं लोकसभा चुनाव में दिल्ली के सदर बाजार इलाके में स्कूटर से प्रचार पर निकले भाजपा के उम्मीदवार विजय गोयल। चांदनी चौक की तंग गलियों में पहुंचने के लिए स्कूटर ही मुफीद साधन है। गोयल ने इस चुनाव में जीत दर्ज की थी। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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नई दिल्ली में 20 दिसंबर 1984 को लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी एक रैली में लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए। उनके बाएं ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एचकेएल भगत दिख रहे हैं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर थी। दिसंबर में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 415 सीटें जीतीं। यह कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी जीत थी। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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12वीं लोकसभा चुनाव के दौरान 16 फरवरी 1998 को नई दिल्ली के एक बूथ पर वोट डालतीं वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज। पास में खड़े हैं नई दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी जगमोहन। वे इस सीट से विजयी हुए थे। चुनाव के बाद भाजपा ने 20 दलों की मदद से केंद्र में एनडीए सरकार का गठन किया था और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी 13 अक्टूबर 1989 को लोकसभा के प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप देते हुए। चित्र में अर्जुन सिंह, सीताराम केसरी, गुलामनबी आजाद आदि नजर आ रहे हैं। चुनाव में कांग्रेस ने 197 सीटें जीतीं। राष्ट्रीय मोर्चे ने वाम मोर्चे और भाजपा के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी 17 जून 1991 को नई दिल्ली लोकसभा सीट से जीत हासिल करने के बाद बेटे जयंत आडवाणी और समर्थकों के साथ खुशी मनाते। उन्हें इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार और मशहूर सिने अभिनेता राजेश खन्ना ने कड़ी टक्कर दी थी। आडवाणी महज डेढ़ हजार मतों से अपनी सीट बचा सके थे। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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1989 में हुए नौवीं लोकसभा चुनाव के दौरान जनता दल के सचिव अजित सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से गुफ्तगू करते। बैठक में बाएं से यशवंत सिन्हा, रामविलास पासवान, एस जयपाल रेड्डी आदि शामिल हुए। बाद में द्रमुक, तेदेपा और असम गण परिषद सहित कई क्षेत्रीय दल जनता दल से मिल गए और नेशनल फ्रंट बना। इसी फ्रंट ने केंद्र में सरकार बनाई। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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फरवरी 1998 में दिल्ली में आयोजित चुनावी रैली में सोनिया गांधी के कान में कुछ कहते राहुल गांधी। मंच पर बैठे हैं कांग्रेस उम्मीदवार आर के धवन और अजय माकन, शीला दीक्षित और मीरा कुमार। बारहवीं लोकसभा चुनाव में 20 पार्टियों की मदद से एनडीए का गठन किया गया था और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। (फोटो-हिन्दुस्तान)
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