दिलचस्प कहानी: 25 पैसे से शुरू हुआ वड़ापाव पूरे भारत में कैसे हुआ मशहूर?

मुंबई की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों और समुद्र से नहीं, बल्कि वड़ापाव से भी जुड़ी है। यह सस्ता, स्वादिष्ट और पेट भरने वाला स्ट्रीट फूड है, जो आज पूरे भारत में बेहद लोकप्रिय हो चुका है।

Shubhangi GuptaMar 10, 2026 01:35 pm IST
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मुंबई और वड़ापाव

मुंबई को अक्सर 'सपनों का शहर' कहा जाता है। यहां की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को ऐसा खाना चाहिए जो जल्दी मिले और पेट भी भर दे। वड़ापाव ऐसा ही एक स्ट्रीट फूड है। यह सिर्फ एक स्नैक नहीं बल्कि मुंबई की पहचान बन चुका है। अमीर हो या गरीब, हर कोई इसे पसंद करता है। यही वजह है कि वड़ापाव को मुंबई की संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है।

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वड़ापाव की शुरुआत

वड़ापाव की शुरुआत 1960–70 के दशक में मानी जाती है। उस समय अशोक वैद्य नाम के एक व्यक्ति ने दादर स्टेशन के पास एक छोटा सा स्टॉल लगाया था। उन्होंने आलू के वड़े को पाव के बीच रखकर बेचना शुरू किया। लोगों को यह सस्ता और स्वादिष्ट खाना बहुत पसंद आया। धीरे-धीरे यह स्टॉल मशहूर हो गया और वड़ापाव मुंबई का सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बन गया।

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मजदूरों का पसंदीदा खाना

उस समय मुंबई में बड़ी संख्या में मिल वर्कर्स यानी फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर रहते थे। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे, इसलिए उन्हें ऐसा खाना चाहिए था जो सस्ता और पेट भरने वाला हो। वड़ा और पाव का यह मेल उनके लिए बिल्कुल सही था। यह जल्दी मिल जाता था और लंबे समय तक भूख भी नहीं लगती थी। इसलिए मजदूरों के बीच वड़ापाव जल्दी ही लोकप्रिय हो गया।

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25 पैसे से शुरू हुई कहानी

जब वड़ापाव पहली बार बेचा गया था, तब इसकी कीमत सिर्फ 25 पैसे थी। यह इतना सस्ता था कि लगभग हर कोई इसे खरीद सकता था। समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और आज भी मुंबई में यह सबसे ज्यादा बिकने वाले स्ट्रीट फूड में से एक है। अलग-अलग इलाकों में इसकी कीमत अलग हो सकती है, लेकिन इसका स्वाद और लोकप्रियता आज भी वही है।

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मुंबई के मशहूर वड़ापाव स्टॉल

मुंबई में कई जगह वड़ापाव मिलता है, लेकिन कुछ दुकानें बहुत मशहूर हैं। अशोक वड़ापाव और आराम वड़ापाव ऐसी ही दो जगहें हैं जहां लोग वड़ापाव खाने के लिए लाइन में लगते हैं। इन दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक भीड़ लगी रहती है। लोग खासतौर पर यहां का असली और पारंपरिक स्वाद चखने के लिए आते हैं।

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आराम मिल्क बार की कहानी

आराम मिल्क बार भी मुंबई की एक पुरानी और मशहूर जगह है। इसकी शुरुआत 1939 में श्रीरंग तांबे ने की थी। यहां कई महाराष्ट्रीयन नाश्ते मिलते हैं जैसे साबूदाना वड़ा, मिसल, उपमा और कांदे पोहे। लेकिन यहां का सबसे खास आइटम सफेद वड़ा है। इस वड़े में हल्दी नहीं डाली जाती, जिससे इसका स्वाद थोड़ा अलग और खास बन जाता है।

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कैसे बना पहला वड़ा

कहते हैं कि वड़ापाव की शुरुआत एक संयोग से हुई थी। एक दिन अशोक वैद्य के पास आलू की सब्जी बच गई थी। उसे फेंकने के बजाय उन्होंने आलू को बेसन में लपेटकर तल दिया। फिर उसे पाव के साथ बेचने लगे। लोगों को इसका स्वाद इतना पसंद आया कि यह जल्दी ही लोकप्रिय हो गया। इस तरह एक साधारण आइडिया ने मुंबई का सबसे प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड बना दिया।

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आज भी क्यों है इतना लोकप्रिय

आज वड़ापाव सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि पूरे भारत में लोकप्रिय हो चुका है। गुजरात, दिल्ली और कई अन्य शहरों में भी लोग इसे बड़े शौक से खाते हैं। यह सस्ता, स्वादिष्ट और जल्दी मिलने वाला स्नैक है। यही कारण है कि आज भी लाखों लोग अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में वड़ापाव को सबसे आसान और पसंदीदा खाने के रूप में चुनते हैं।

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