1/7अगर आपको लगता है कि गेंदे का फूल सिर्फ पूजा में चढ़ाने और घर की बालकनी की शोभा बढ़ाने के लिए होता है तो आप गलत है। तुलसी, पुदीना, अपराजिता के पत्तों और फूलों की ही तरह इस फूल से बनने वाली चाय सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होती रही है। इसमें ल्यूटीन, जीएक्सैंथिन, फ्लेवोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जो सेहत को कई गजब के फायदे देते हैं।

पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को पेट में तेज दर्द और ऐंठन महसूस होती है। इस दर्द से राहत दिलाने में गेंदे के फूल की चाय मदद कर सकती है। इस चाय में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पीरियड्स के दौरान महसूस होने वाली दिक्कतों को दूर करने में मदद करते हैं।

गेंदे के फूल की चाय पेट की जलन, गैस, अपच, अल्सर और IBS जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है, क्योंकि इसमें पाचन सुधारने और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। यह कब्ज, पेट दर्द और एसिडिटी को भी कम करने में मददगार है।

गेंदे की चाय अपने शक्तिशाली सूजन-रोधी (anti-inflammatory) और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण जोड़ों के दर्द, गठिया और शरीर की सूजन को कम करने में असरदार मानी जाती है। इसमें कैलेंडिक एसिड जैसे यौगिक होते हैं जो ऊतक मरम्मत और सूजन घटाने में मदद करते हैं।

गेंदे के फूल की चाय हल्की शामक (sedative) प्रकृति के कारण नींद में सुधार और तनाव कम करने में मदद करती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

गेंदे के फूल की चाय पीने या गरारा करने से मुंह के छाले, मसूड़ों की सूजन और गले की खराश जल्दी ठीक होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और हीलिंग गुण होते हैं. यह घावों को भरने और सूजन कम करने में मदद करता है।

गेंदे के फूल की चाय बनाने के लिए सबसे पहले गेंदे के फूल अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। अब एक पैन में पानी गर्म करके उसमें गेंदे के फूल की पत्तियों को डालकर उबाल लें। जब पानी उबलकर थोड़ा कम हो जाए तो गैस बंद करके छान लें। आप इस चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पी सकते हैं।
