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जानें क्या है पीसीओएस, पीसीओएस बीमारी पर लगाम लगाएगी ये डाइट

हिन्दुस्तान फीचर टीम, नई दिल्ली
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पीसीओएस महिलाओं को होने वाली एक आम बीमारी बन चुकी है। इससे बचना आसान नहीं है, लेकिन आहार में बदलाव लाकर इस पर काबू जरूर पाया जा सकता है, बता रही हैं स्वाति गौड़। पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस, एक ऐसी समस्या है, जो औसतन हर पांच में से एक भारतीय महिला को हो जाती है। पहले जहां यह बीमारी 30 साल से ऊपर की महिलाओं में ही देखने को मिलती थी, वहीं अब छोटी उम्र की लड़कियां भी इसकी चपेट में आने लगी हैं, जो बहुत चिंताजनक बात है।
क्या है पीसीओएस? जब किसी महिला के शरीर में मौजूद सेक्स हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव होने लगते हैं, तो मासिक चक्र यानी पीरियड्स पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में महिला के अंडाशय में एंड्रोजन नामक हार्मोन सामान्य से अधिक मात्रा में बनने लगता है। जब लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहती है, तो ओवरी यानी अंडाशय में अल्सर बनने लगता है, जिसे सिस्ट भी कहते हैं। यह सिस्ट असल में छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। यदि समय रहते इस समस्या का उचित इलाज न किया जाए तो सिस्ट का आकार तेजी से बढ़ने लगता है और महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती है। इस बीमारी के कारण गर्भधारण में समस्या आ सकती है। इसके साथ-साथ अंडाशय भी इससे प्रभावित होने लगता है और कैंसर हो जाने तक की नौबत आ सकती है।
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क्या हैं कारण असंतुलित खानपान: परिवार का ध्यान रखने के चक्कर में कई महिलाएं अपने खानपान की अनदेखी कर देती हैं। ऐसे में भूख लगने पर या खाना बर्बाद होने के डर से जो बचता है, उसे खाकर ही वे पेट भर लेती हैं। इसके अलावा जंक फूड, बहुत ज्यादा तेल-चिकनाई वाला खाना या अत्यधिक मात्रा में मीठा खाना भी छोटी उम्र में पीसीओएस होने का करण बन जाता है।
अनियमित जीवनशैली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक ऐसी समस्या बन गयी है, जो अपने साथ और सौ बीमारियां लेकर आती है। इसके अलावा देर रात तक जागना और नशे की लत भी सेहत को प्रभावित करती है और इस बीमारी को बुलावा देती है। मोटापा: ज्यादा गरिष्ठ भोजन का सेवन, अनियमित जीवनशैली और शारीरिक श्रम बिल्कुल न करने से वजन बढ़ने लगता है और मोटापा पैर पसारने लगता है। वजन बढ़ने से एंड्रोजन हार्मोन का स्राव बढ़ने लगता है, जिसकी वजह से गर्भाशय में सिस्ट बनने लगते हैं।
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पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को टाइप-2 डाइबिटीज होने का खतरा भी बना रहता है, लेकिन अपने आहार में मुख्य रूप से साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स और कुट्टू का आटा आदि शामिल कर लेने से शरीर में शर्करा की मात्रा तो संतुलित बनी ही रहती है, साथ ही अच्छे पाचन के लिए पर्याप्त मात्रा में फाइबर भी मिल जाता है। दरअसल, साबुत अनाज को पचाने में शरीर ज्यादा कैलोरी खर्च करता है और हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी में विटामिन-बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
आंकड़े बताते हैं कि करीब 60 फीसदी से ज्यादा पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में विटामिन-बी की कमी पायी जाती है। इस विटामिन की कमी से अनियमित मासिक धर्म, चेहरे पर अनचाहे बाल और मोटापे की समस्या बढ़ती है। इसलिए अपने आहार में पालक, पत्तागोभी और ब्रोकली को अवश्य शामिल करें। इतना ही नहीं, ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्मोन्स को नियंत्रित करने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए फ्लैक्स सीड और चिया सीड का सेवन नियमित रूप से अवश्य करना चाहिये। साथ-साथ सेब, नाशपाती, ब्लूबेरी और शकरकंदी जैसे आहार वजन तो नियंत्रित रखते ही हैं, साथ ही रक्त में शर्करा के स्तर को भी संतुलित बनाए रखते हैं। इसलिए ताजे मौसमी फलों का सेवन नियमित रूप से अवश्य लें।
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इनसे रखें परहेज डिब्बाबंद खाद्य-पदार्थ शरीर में इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, जिससे आपको शुगर हो सकती है। किन्हीं खास स्थितियों में दूध या दूध से बनी चीजों से चेहरे पर कील-मुहांसे हो सकते हैं या इंसुलिन की मात्रा बढ़ सकती है। अत्यधिक तैलीय भोजन शरीर में एंड्रोजन के स्तर को बढ़ा देता है, जिससे पीसीओएस की समस्या और गंभीर हो सकती है। सोया का किसी भी रूप में सेवन शरीर में एंड्रोजन के स्तर को प्रभावित करता है और इसे बढ़ा देता है। ग्लूटन युक्त आहार, जैसे गेहूं की रोटी, किसी विशेष स्थितियों में मधुमेह होने का कारण बन सकता है। इसलिए इसके सेवन से भी परहेज करना चाहिये। (न्यूट्रिशनिस्ट सांची नायक से बातचीत पर आधारित) milk
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  • Web Title:Learn what is PCOS PCOS will bite the disease these diets