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हड्डियों की सेहत को हर उम्र में रखें दुरुस्त, जानें इन बातों के बारे में

हिन्दुस्तान फीचर टीम, नई दिल्ली
bone loss
बढ़ती उम्र और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं भारतीय महिलाओं में आम हैं। डाइट में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों की कमी, खराब जीवनशैली और सूरज की रोशनी से बढ़ रही दूरी महिलाओं की हड्डियों को और कमजोर बना रही है। कैसे अपनी हड्डियों की सेहत को हर उम्र में रखें दुरुस्त, बता रही हैं दिव्यानी त्रिपाठी ऊह, आह और आउच... और लीजिए लग गया दौड़ती-भागती जिंदगी में अल्पविराम। चलना, उठना, यहां तक कि सीधे देर तक खड़े रहना भी मुश्किल हो गया। कारण कमजोर हड्डियां, जो सेहत से जुड़ी महिलाओं की आम समस्याओं में से एक है। कमर, जोड़ों या फिर घुटनों का दर्द अकसर महिलाओं को परेशान करता है। तो, आप कहेंगी कि बढ़ती उम्र के साथ तो यह समस्या सभी को होती है। होती है, पर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है। कारण है उनकी हड्डियों की सेहत का खराब होना। इसे ठीक रखकर अनचाहे दर्द से निजात पाई जा सकती है। इस बाबत हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप अग्रवाल कहते हैं कि भारतीय महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हड्डियों की समस्या ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अधिकांश भारतीय महिलाओं की न सिर्फ दिनचर्या खराब होती है, बल्कि उनमें व्यायाम का अभाव भी होता है। संतुलित आहार की कमी भी इस समस्या को बढ़ा देती है। जीवनशैली के स्तर पर खुद में कुछ छोटे-मोटे बदलाव लाकर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बना सकती हैं।
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कैल्शियम से बढ़ाएं दोस्ती यूं तो सभी को कैल्शियम की आवश्यकता होती है, लेकिन महिलाओं को कुछ खास मौकों या फिर उम्र के कुछ खास पड़ाव पर अतिरिक्त कैल्शियम और विटामिन-डी की आवश्यकता होती है। बकौल डॉ. अनूप, गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली मांओं को सामान्य महिलाओं से दोगुने कैल्शियम की आवश्यकता होती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि स्तनपान करवाने के दौरान महिलाओं के बोन मास में पांच फीसदी की कमी आ जाती है। प्री-मेनोपॉज यानी 42 से 45 उम्र की महिलाओं को भी अतिरिक्त कैल्शियम की दरकार होती है। इस स्थिति में कई बार एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। पोस्ट मेनोपॉज की अवस्था में कैल्शियम की अतिरिक्तआवश्यकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके बाद पांच से सात साल में महिलाओं की हड्डियों के घनत्व में बीस फीसदी की कमी आ जाती है। साठ साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को सामान्य महिलाओं से लगभग चालीस फीसदी अतिरिक्त कैल्शियम की आवश्यकता होती है। यहां ख्याल इस बात का भी रखना है कि हड्डियों में कैल्शियम के अवशोषण के लिए विटामिन-डी की भी आवश्यकता होती है। इसकी कमी होने पर कैल्शियम खाने के बाद भी उसकी पूर्ति नहीं हो पाती। नतीजा, कमजोर हड्डियां।
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व्यायाम है जरूरी अगर आपके पास समय का अभाव है तो दौड़ना आपके लिए ठीक रहेगा। इसके लिए आपको सिर्फ दो मिनट निकालने हैं। हर रोज एक से दो मिनट तेज दौड़ हड्डियों की सेहत को भी दुरुस्त रखती है। कड़ी मेहनत वाले शारीरिक व्यायाम बोन सेल्स को बढ़ाने का काम करते हैं, जो कि हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं। वहीं अगर मेनोपॉज शुरू हो चुका है तो सप्ताह में दो से तीन बार कम शारीरिक क्षमता वाले शारीरिक व्यायाम करें। इनमें एरोबिक, टहलना, धीमी जॉगिंग आदि भी शामिल कर सकती हैं। उछलने से भी हड्डियों की सेहत बेहतर होती है। 2015 के एक शोध की मानें तो चार महीने तक एक दिन में दो बार दस से बीस बार जंप करने वाली महिला की हिप बोन मिनरल डेंसिटी एक सामान्य महिला के मुकाबले ज्यादा होती है। उछलने पर हड्डियों में एक माइक्रो स्ट्रेस उत्पन्न होता है और हड्डी दोबारा मजबूत बनती है। इसके अलावा दिन में 12 मिनट का कोबरा आसन आपकी हड्डियों को मजबूती प्रदान करेगा, खासतौर से आपकी रीढ़ और कूल्हे की हड्डी को।
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हब्र्स का करें प्रयोग: अजवाइन की पत्ती, पुदीना, धनिया पत्ती, करी पत्ता सरीखे हब्र्स को अपनी रसोई और रेसिपी में जगह दें। ये खाने में नमक की जरूरत को घटाएंगे। शरीर में अधिक मात्रा में नमक कैल्शियम के अवशोषण को कम करता है, जिसका असर हड्डियों की सेहत पर पड़ता है। टोफू है फायदेमंद: आपकी खुराक में सोया की मौजूदगी ढेरों फायदे दिला सकती है। इसको आप टोफू के शक्ल में भी खा सकती हैं। फायदेमंद पोषण से भरी खुराक माने जाने वाला सोया आपकी हड्डियों को भी मजबूती देता है। इतना ही नहीं, इसमें मौजूद आइसोफ्लेवोन्स हमें हड्डियों से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है। मछली है विटामिन-डी से भरी: अगर मांसाहारी हैं तो सालमन मछली को खुराक में शामिल करना आपकी हड्डियों की सेहत के लिए बेहतर रहेगा। तीन सालमन फिश से आपको 447 आईयू विटामिन-डी मिलता है, जबकि दो कैंड सार्डिन मछली 46 आईयू विटामिन-डी देती है। तीन टूना मछली से 154 आईयू विटामिन-डी मिल जाता है। इनका भरपूर सेवन आपको ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचाएगा।
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खानपान में हो संतुलन संतुलन हर चीज में जरूरी है, खानपान के मामले में भी। हड्डियों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए आपको अपनी खुराक में सब्जी, फल, साबुत अनाज, सूखे मेवे, दूध से बने उत्पाद और समुद्री भोजन के बीच जुगलबंदी बिठानी होगी। इनसे आपको विटामिन-डी, कैल्शियम के साथ ही साथ विटामिन-के, विटामिन-बी6, विटामिन-बी12 और मैग्नीशियम मिलेगा, जो कि हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में सहायक होता है। शाकाहार और मांसाहार में भी संतुलन बेहद जरूरी है। ज्यादा मात्रा में मांसाहार से मिला प्रोटीन आपकी किडनी पर दुष्प्रभाव डाल सकता है, जिसके चलते शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है। मांसाहार खाते वक्त आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि आपकी प्लेट में एक तिहाई सब्जियां भी हों। डाइटिंग करती है नुकसान कई बार हम जानबूझ कर अपनी हड्डियों को कमजोर बना जाते हैं। ढेर सारा व्यायाम और कम पोषण आपकी हड्डियों के घनत्व को कम कर देता है। बहुत ज्यादा डाइटिंग का असर पीरियड पर भी पड़ता है। इससे शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर भी कम होता है। इन आदतों से करें तौबा माना कि कॉफी के सेहत से जुड़े कई फायदे हैं, लेकिन हर दिन तीन कप से अधिक कॉफी हड्डियों में कैल्शियम के अवशोषण को कम करती है। अगर आप कैल्शियम सप्लीमेंट शुरू करने जा रही हैं तो बेहतर होगा कि किसी जानकार से उसके हड्डियों पर पड़ने वाले परिणाम या दुष्परिणाम के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें। यहां पर इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि अगर आपका डॉक्टर आपकी हड्डियों की सेहत को लेकर चिंता में है तो उपचार से बचने की कोशिश न करें। उनके द्वारा दी गई दवाएं आपको ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचा सकती हैं। कोल्ड ड्रिंक की हर सर्विंग के साथ ही महिलाओं के हिप ज्वाइंट फ्रैक्चर की आशंका 14 फीसदी बढ़ जाती है। कोल्ड ड्रिंक से दूर ही रहें। कैल्शियम जरूरी है, पर अधिक कैल्शियम हृदय रोग की समस्या खड़ी कर सकता है। लिहाजा कैल्शियम सप्लीमेंट सोच-समझकर खाएं। प्रति दिन 2000 एमजी से ज्यादा कैल्शियम नुकसानदेह हो सकता है। ये जानती हैं क्या? क्या आपको मालूम है कि हमारी नई हड्डियां बनती हैं? इस बाबत डॉ. अनूप कहते हैं कि हमारी हड्डियां भी प्याज की तरह परत वाली होती हैं, जिसमें बाहर पुरानी और भीतर नई परत होती है, जिसे बनने में लगभग साल भर का वक्त लगता है। पुरानी परत हटती जाती है और नई परत ऊपर आ जाती है। 22 साल की उम्र तक हमारे शरीर में 90 फीसदी बोन मास बन जाता है। हमारा शरीर 30 साल तक की उम्र तक धीमी गति में ही सही यह काम करता रहता है। उसके बाद मेनोपॉज तक शरीर में बोन मास एक जैसा ही बना रहता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि पुरानी हड्डियों की परत जल्दी-जल्दी हटने लगती है, जबकि हड्डियों की नई परत उतनी जल्दी नहीं बन पातीं। यही वजह है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस होने का ज्यादा खतरा होता है।
neck pain
खुराक से जुड़ी जरूरी बातें किसे चाहिए कितना कैल्शियम? जन्म से छह महीने तक- 400 एमजी प्रतिदिन छह महीने से 1 साल तक- 600 एमजी प्रतिदिन एक साल से दस साल- 800 से 1200 एमजी 11 साल से 24 साल-1200 से 1400 एमजी 25 से पचास साल-1000 एमजी 51 या उससे अधिक -1500 एमजी
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