
डॉग्स इंसानों की तरह पसीना नहीं निकालते। उनका शरीर हीट को कंट्रोल करने के लिए जीभ बाहर निकालकर तेजी से सांस लेता है। यही वजह है कि तेज गर्मी में उन्हें जल्दी थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक हो सकता है। खासकर छोटे पपी, बुजुर्ग डॉग्स और ज्यादा फर वाले ब्रीड्स को ज्यादा खतरा रहता है। अगर समय रहते ध्यान ना दिया जाए तो उनकी हालत गंभीर भी हो सकती है। इसलिए गर्मियों में डॉग्स की खास देखभाल करना बहुत जरूरी है।

2/8अगर आपका डॉग बहुत ज्यादा हांफ रहा है, सुस्त दिख रहा है या बार-बार पानी मांग रहा है तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। कई बार डॉग्स का बॉडी टेम्परेचर 105 से 106 डिग्री तक पहुंच जाता है। कुछ मामलों में नाक से खून भी आता है। उल्टी, कमजोरी, चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। ऐसे संकेत दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देरी करना आपके डॉग के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

3/8गर्मी के मौसम में डॉग को दोपहर की तेज धूप में बाहर ले जाना नुकसानदायक हो सकता है। सुबह 9 बजे से पहले और शाम 6 बजे के बाद ही वॉक पर लेकर जाएं। इस समय मौसम थोड़ा ठंडा रहता है और डॉग को कम परेशानी होती है। गर्म सड़क या फर्श उनके पंजों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। वॉक के दौरान पानी जरूर साथ रखें। अगर आपका डॉग जल्दी थकने लगे तो तुरंत उसे आराम दें और छांव वाली जगह पर बैठाएं।

4/8गर्मियों में डॉग्स के लिए पानी सबसे जरूरी चीज है। कई लोग दिन में सिर्फ एक-दो बार पानी रखते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। उनके बाउल में हमेशा साफ और ठंडा पानी होना चाहिए। आप चाहें तो मार्केट में मिलने वाले डॉग इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे डॉग का शरीर हाइड्रेट रहता है। अगर आपका डॉग कम पानी पीता है तो उसे तरबूज और खरबूजे जैसे पानी वाले फल भी दे सकते हैं। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा कम होता है।

5/8Golden Retriever, German Shepherd और Cocker Spaniel जैसे लंबे बालों वाले डॉग्स को गर्मी ज्यादा परेशान करती है। इनके फर में टिक्स आसानी से छिप जाते हैं और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे डॉग्स को ठंडी जगह पर रखें और समय-समय पर उनके फर की सफाई करें। जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह से हल्की ट्रिमिंग भी करवा सकते हैं। Siberian Husky जैसे exotic breed डॉग्स को तो गर्मियों में AC या कूलर वाली जगह पर रखना जरूरी होता है।

6/8गर्मियों में डॉग्स में टिक इंफेक्शन तेजी से फैलता है। ये छोटे कीड़े फर में छिपकर खून चूसते हैं और कई बीमारियां फैलाते हैं। Babesiosis या Tick Fever ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है। इससे डॉग को तेज बुखार, कमजोरी और नाक से खून आने जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए डॉग के शरीर और कानों को नियमित चेक करें। डॉक्टर की सलाह से anti-tick shampoo या दवा का इस्तेमाल करें। घर और डॉग के सोने की जगह को भी साफ रखना जरूरी है।

7/8गर्मियों में डॉग्स को हल्का और आसानी से पचने वाला खाना देना चाहिए। ज्यादा भारी खाना उन्हें सुस्त बना सकता है। अगर आपका डॉग वेजेटेरियन है तो तरबूज, खीरा और खरबूजा जैसे फल अच्छे विकल्प हैं। रोज नहलाना जरूरी नहीं है, लेकिन हफ्ते में एक बार अच्छी तरह जरूर नहलाएं। ज्यादा नमी रहने से स्किन इंफेक्शन और खुजली जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए नहलाने के बाद उनके शरीर को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है।

8/8गर्मी में डॉग्स जल्दी बीमार पड़ते हैं, इसलिए उनका नियमित हेल्थ चेकअप करवाना जरूरी है। समय-समय पर deworming करवाने से parvovirus जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। अगर डॉग अचानक खाना छोड़ दे, बहुत सुस्त हो जाए या बार-बार उल्टी करे तो इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। साथ ही टिक इंफेक्शन की दवा भी समय पर दिलवाएं। थोड़ी-सी सावधानी आपके प्यारे पेट को गर्मियों में सुरक्षित और स्वस्थ रख सकती है।
