1/8बदलते समय के साथ व्यक्ति के लाइफस्टाइल और फूड हैबिट्स में भी कई बड़े बदलाव आएं हैं। बिजी शेड्यूल की वजह से ज्यादातर समय रहने वाली वक्त की कमी ने प्रोसेस्ड और फ्राइड जंग फूड्स को हमारी थाली का हिस्सा बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं आपके खान-पान और लाइफस्टाइल रूटिन का ना सिर्फ आपकी मेंटल हेल्थ पर बल्कि गट हेल्थ पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। बता दें, आपकी गट हेल्थ पूरे शरीर का पॉवर हाउस होती है। लेकिन जब ये बीमार होती है, तो शरीर के बाकी हिस्सों पर इसका असर साफ दिखाई देने लगता है। ऐसे में आइए जानते हैं आपकी उन आदतों के बारे में जो अनजाने में आपकी गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं।

रेड मीट में पाए जाने वाले सेचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल आंत की सूजन को बढ़ाकर पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिससे आंतों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

फ्राइड फूड खाने में भले ही टेस्टी लगता हो, लेकिन आपकी गट हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। ऐसा भोजन पेट की परत को खराब करके हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।

एस्पार्टेम और सुक्रालोज जैसी आर्टिफिशियल शुगर गट हेल्थ के संतुलन को बिगाड़कर खतरनाक बैक्टीरिया के विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं, जो आपकी आंत को नुकसान पहुंचाते हैं।

जरूरत से ज्यादा शराब पीने से व्यक्ति का पाचन तंत्र खराब हो सकता है। यह पेट की परत में जलन और सूजन की वजह बनकर गट बैक्टीरिया की संरचना में बदलाव कर सकता है, जिससे इंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं।

खराब डाइट लेना और फिजिकल एक्टिविटी न करने जैसी आदतें पाचन क्रिया पर बुरा असर डाल सकती हैं। ऐसे में शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से तनाव को कम करने के साथ आंत के स्वास्थ्य में सुधार भी किया जा सकता है। फिटनेस फ्रीक लोगों में गुड बैक्टीरिया का लेवल अच्छा बना रहता है। जिससे मेटाबॉलिक हेल्थ सुधरने के साथ मोटापे की समस्या भी दूर रहती है।

बढ़ता तनाव ना सिर्फ आपकी मानसिक शांति छीनता है बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण भी बनने लगता है। तनाव की वजह से पेट में मौजूद गुड बैक्टीरिया की संख्या कम होने लगती है।

अच्छी सेहत के लिए नींद भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि आहार और व्यायाम। अच्छी नींद शरीर को मरम्मत करने और अगले दिन के लिए फिट और तैयार होने में सक्षम बनाती है। लेकिन जब व्यक्ति अच्छी नींद नहीं ले पाता है तो उसेक शरीर में हार्मोन असंतुलित होकर तनाव हार्मोन, कोर्टिसोल को बढ़ सकते हैं। बढ़ा हुआ तनाव आंतों की पारगम्यता की समस्या पैदा कर सकता है - जिसे लीकी गट के रूप में जाना जाता है। यहां से भोजन और विषाक्त पदार्थ आंत से होकर रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं।
