1/7धनतेरस के साथ ही दिवाली के 5 दिवसीय पर्व की शुरुआत हो जाती है। धनतेरस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और फिर भाईदूज। खुशियों से भरे इन त्योहारों पर दीए जलाना बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं ये दीए घर में खुशहाली, सौभाग्य और सुख-समृद्धि ले कर आते हैं। इन पांचों दिनों कितने दिए जलाने हैं, ये भी काफी महत्व रखता है। हर एक संख्या का गहरा अर्थ होता है। तो आइए जान लेते हैं कि धनतेरस से भाईदूज तक, आपको कब कितने दीए जलाने हैं।

धनतेरस को भगवान धनवंतरि के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन 13 दीए जरूर जलाने चाहिए। ये घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली को अट्रैक्ट करते हैं। घर के मुख्य द्वार, रसोई और पूजा घर में दीए जरूर लगाएं। ये घर में पॉजिटिविटी अट्रैक्ट करते हैं।

छोटी दिवाली को 'नरक चतुर्दशी' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन 14 दीए जलाना शुभ माना जाता है। ये घर से नेगेटिविटी दूर करने में मदद करते हैं। कहते हैं अगर दीए के तेल या घी में जरा सा कुछ मीठा मिला दिया जाए, तो जीवन में भी मिठास और खुशहाली घुल जाती है।

बड़ी दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन के दिन, कम से कम 21 दीए तो जरूर जलाएं। वैसे इस दिन आप ढेर सारे दीए जला सकते हैं। मान्यता है कि घर के आंगन में दीए जलाने से माता लक्ष्मी का आगमन होता है।

वास्तु के अनुसार गोवर्धन पूजा वाले दिन 7 दीए जलाना शुभ माना जाता है। घर के आंगन, पूजा घर और रसोई में दीए जरूर जलाने चाहिए। कहते हैं ऐसा करने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भाई दूज के दिन 5 दीए जलाना बहुत शुभ माना जाता है। ये घर में आने वाली नेगेटिविटी को दूर रखते हैं। इतना ही नहीं ये संबंधों में मधुरता बनाएं रखने में भी मदद करते हैं।

हर दीए का अपना महत्व होता है। घर के मुख्य द्वार, रसोई घर, पूजा घर, खिड़की, कोने और आंगन में दीए जलाएं। दीए जलाने से घर में सुख-समृद्धि, पॉजिटिविटी और खुशहाली बनी रहती है।
