
सेहतमंद रसोई सिर्फ महंगे सामान से नहीं बनती! हम अक्सर सोचते हैं कि महंगे बर्तन और नए उपकरण ही रसोई को बेहतर बनाते हैं। लेकिन डॉक्टर पंक्ति शाह (M.D. Physician & Diabetologist, Vadodara) के अनुसार, असली बात यह है कि रसोई में ऐसी चीजें कम हों, जिनसे लंबे समय तक शरीर का बेवजह केमिकल्स से संपर्क होता रहे। यह नुकसान एक दिन में नहीं होता, लेकिन सालों तक छोटी-छोटी लापरवाहियां सेहत पर असर डाल सकती हैं। इसलिए रसोई की कुछ आदतों को समय रहते बदलना जरूरी है।

2/7गर्म दाल, सब्जी या चावल को सीधे प्लास्टिक के डिब्बे में रखना सही आदत नहीं है। गर्मी की वजह से प्लास्टिक से कुछ केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं। इसलिए पहले खाने को थोड़ा ठंडा होने दें और अगर संभव हो तो कांच या स्टील के डिब्बों का इस्तेमाल करें। यह छोटी-सी आदत आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

3/7अगर प्लास्टिक की बोतल पुरानी हो गई है, उस पर खरोंच हैं या वह धूप और बार-बार धोने से खराब दिखने लगी है, तो उसे बदल देना चाहिए। समय के साथ प्लास्टिक कमजोर होने लगता है। ऐसे में नई बोतल या स्टील और कांच की बोतल का इस्तेमाल बेहतर विकल्प हो सकता है।

4/7टमाटर, नींबू, इमली या सिरके जैसी खट्टी चीजों को एल्युमिनियम फॉयल में लंबे समय तक लपेटकर रखना सही नहीं माना जाता। ऐसी चीजें फॉयल के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं। बेहतर होगा कि इन्हें कांच या स्टील के डिब्बे में ही रखा जाए।

5/7अगर नॉन स्टिक तवे या पैन की परत जगह-जगह से निकल गई है या उस पर गहरी खरोंच आ गई है, तो उसे बदल देना बेहतर होता है। खराब परत वाले बर्तन में खाना बनाना सही नहीं माना जाता। ऐसे बर्तनों की जगह नए या दूसरे सुरक्षित विकल्प चुनना लंबे समय में बेहतर फैसला हो सकता है।

6/7कई घरों में मसालों के प्लास्टिक डिब्बे गैस के बिल्कुल पास रखे होते हैं। रोज मिलने वाली गर्मी से प्लास्टिक जल्दी खराब हो सकता है। अगर संभव हो तो मसालों को कांच या स्टील के डिब्बों में रखें और उन्हें चूल्हे से थोड़ी दूरी पर रखें। इससे डिब्बे भी ज्यादा समय तक टिकेंगे।

7/7डॉक्टर पंक्ति शाह बताती हैं कि इन चीजों का इस्तेमाल करने से एक-दो दिन में कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। चिंता तब होती है, जब सालों तक रोजाना ऐसे ही संपर्क बना रहता है। इसलिए छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके अनचाहे केमिकल्स के संपर्क को कम किया जा सकता है।
