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बच्चे पर अत्यधिक दबाव डालने के होते हैं कई नुकसान

हिन्दुस्तान फीचर टीम, नई दिल्ली
preschool kids
खुद के संतोष के लिए अमूमन हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा परीक्षा से लेकर डांस, स्पोट्र्स, म्यूजिक, मार्शल आर्ट... हर चीज में अच्छा प्रदर्शन करे। लेकिन, ऐसा भला कैसे संभव है? बच्चों पर हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालकर हम अभिभावक कम उम्र में उन्हें तनाव का शिकार बना रहे हैं। अगर आप चाहती हैं कि बच्चा सुपरहिट बने, तो पहले खुद सुपर पेरेंट्स बनें। अगर बच्चा कहे, ‘उसके मम्मी-पापा को देखो’ तब अकसर हम बच्चों को यह सिखाते हैं कि जो मिल रहा है उसमें खुश रहो। लेकिन एक अभिभावक के रूप में हम भी तो लगातार अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से ही कर रहे होते हैं। ‘शर्मा जी की बेटी को देखो, क्लास में फर्स्ट आई है। पड़ोसी के बेटे को देखो, नेशनल गेम्स खेलता है और पढ़ाई में गोल्ड मेडल लाता है।
stress in kids (Symbolic Image)
आपको है बच्चे की मानसिक सेहत की चिंता? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप अपने नौनिहाल की मानसिक अवस्था से अनभिज्ञ हों? कहीं आप ये तो नहीं सोचतीं कि बच्चों को तो केवल स्कूल में मौज-मस्ती करनी होती है, जबकि आप ऑफिस में काम के अत्यधिक दबाव में रहती हैं? यदि आप का जवाब हां है तो आप पूरी तरह से गलत हैं। आज के समय में सिर्फ बड़े ही नहीं, बच्चे भी तनाव में रहते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार, ‘जरूरत से ज्यादा आशाएं, ज्यादा उम्मीदें और अत्यधिक चिंताएं बच्चों में तनाव की खास वजह हैं। अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों से जिस तरह की उम्मीदें रखते हैं, उसके बाद हर बच्चा मन ही मन सोचता है, कि ‘काश मैं कह पाता, मम्मी-पापा मैं आपका बच्चा हूं, रोबोट नहीं।’ इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि बच्चों को अभिभावक द्वारा पढ़ाई में अच्छा करने के लिए प्रेरित किया जाए, न कि डराया जाए। जब बच्चों की मानसिक स्थिति की बात आती है तो नकारात्मकता और नकारात्मक व्यवहार उनकी गतिविधियों से स्पष्ट होता है। बच्चे का बार-बार बीमार होना तनाव का आम लक्षण है। किशोरों के मामले में अत्यधिक दबाव के कारण होने वाले तनाव से विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और बच्चा अवसाद का शिकार हो जाता है। बच्चे पर अत्यधिक दबाव डालने के और क्या-क्या नुकसान होते हैं, आइए जानें:
depression kids
आत्मसम्मान की जंग बच्चों का शानदार प्रदर्शन आज के समय का अनिवार्य मानक बन चुका है। इस प्रेशर के कारण जब बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर पाते, तब भावनात्मक सपोर्ट की कमी और अभिभावक का स्वभाव उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। इस वजह से कई बच्चे कुछ ऐसा कदम भी उठा लेते हैं, जो उन्हें नहीं उठाना चाहिए। पूरी नींद न लेना बेहतरीन कॉलेजों और संस्थानों में दाखिले का तनाव या अच्छे नंबर लाने के दबाव के कारण बच्चे देर रात तक पढ़ाई करते हैं और परिणामस्वरूप वे पर्याप्त नींद न मिलने के कारण मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो जाते हैं। नींद की कमी का असर उनकी शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत पर पड़ता है।
creative kids
दर्द को अनदेखा करना जिंदगी की अनिश्चितता, वर्तमान में संघर्ष और बिखरा हुआ भविष्य छात्रों या बच्चों को बिल्कुल तोड़ देता है। कक्षा में प्रथम आने से लेकर सांस्कृतिक और कलात्मक क्रिया-कलापों में सक्रिय रहने का दबाव छात्रों से उनकी नैसर्गिक प्रतिभा छीन लेता है। यही नहीं, वे चोटिल होने के बावजूद सिर्फ इसलिए परफॉर्म करना चाहते हैं, क्योंकि उनको बेस्ट बनना है। दर्द को यूं अनदेखा करना भविष्य में उनकी मानसिक सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
kids mental stress
नकल की आशंका जब ध्यान उपलब्धि पर होता है तो सीखने के बजाय बच्चे सफलता प्राप्त करने के लिए आसान रास्ते की तलाश करते हैं। चाहे वह छोटा बच्चा हो या बड़ा, वह नकल करने में कोई बुराई नहीं समझता, भले ही नकल की कॉपी को खरीदना ही क्यों न पड़ जाए। आपसी प्रतिस्पर्धा में बच्चे अपने दोस्तों को भी धोखा देने से नहीं हिचकिचाते। यह एक गलत प्रवृत्ति है, जो बाद में खतरनाक बन सकती है।
kids
आत्महत्या का खतरा पढ़ाई जरूरी है, लेकिन पढ़ाई के नाम पर बच्चे को मशीन बना देना गलत है। बच्चों को जिस एक चीज से आजकल सबसे अधिक डर लगता है, वह है नाकामयाब होने का डर। आपकी उम्मीदों को पूरा नहीं करने का डर उन्हें कुछ गलत कदम उठाने पर भी मजबूर कर सकता है। जनवरी, 2018 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, हर 24 घंटे में करीब 26 छात्र खुदकुशी करते हैं यानी हर एक घंटे में औसतन एक छात्र मौत को अपने गले लगा रहा है। इसके लिए परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा प्रमुख कारणों में से एक है। (एसोसिएट प्रोफेसर व बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. पूजा माहौर से बातचीत पर आधारित)
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  • Web Title:disadvantages to putting excessive pressure on the child