
साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण को लेकर लोगों में उत्सुकता है। ग्रहण के पीछे का विज्ञान आज के जमाने में हर किसी को पता है। हालांकि पुराने जमाने में इसको लोग किसी रहस्य की तरह समझते थे। आज भी ग्रहण से जुड़ी की सारी मान्यताएं हैं। जानते हैं इतिहास में ग्रहण से जुड़ी ऐसी घटनाएं जो काफी रोचक हैं।

2/7बात है साल 1504 की। अमेरिका की खोज करने वाले क्रिस्टोफर कोलंबस और उनका दल जमैका के तट पर फंस गया था। उनके जहाज खराब हो चुके थे और खाने-पीने का सामान पूरी तरह खत्म हो चुका था। वहां रहने वालों ने पहले तो उनकी मदद की फिर जैमका के लोगों ने उनको राशन-पानी देने से मना कर दिया। ऐसा होने पर कोलंबस और उनके साथियों का हाल बुरा हो गया। भूख से मौत अब सामने खड़ी थी। जान बचाने के लिए कोलंबस ने दिमाग लगाया।

3/7कोलंबस के पास जर्मन खगोलशास्त्री जोहान्स मुलर का एक पंचांग था। कोलंबस ने उसमें देखा तो पता चला कि 29 फरवरी 1504 को पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ने वाला है। कोलंबस को एक जुगाड़ सूझी। कोलंबस ने जान बचाने के लिए एक दांव खेला। उसने स्थानीय निवासियों से कहा कि उनके देवता वहां के लोगों से बहुत नाराज है। वह लोगों को सजा देंगे और रात में चांद की चमक छीन लेंगे।

4/7जैसे ही ग्रहण शुरू शुरू हुआ कोलंबस ने लोगों को इकट्ठा करके डराना शुरू कर दिया। चंद्रमा पर छाया देखकर लोग समझ नहीं पाए ये क्या हो रहा है।

5/7जैसे ही ग्रहण शुरू हुआ और चांद धीरे-धीरे लाल होने लगा। जैमेका के लोग डर से कांपने लगे। उन्हें लगा कि सच में आसमान से प्रलय आने वाली है।

6/7घबराए हुए लोग कोलंबस के पास दौड़े और उससे अपने देवता को शांत करने की विनती की। कोलंबस ने नाटक करते हुए कुछ देर प्रार्थना की और फिर ग्रहण खत्म होने लगा। चांद को वापस चमकता देख लोग इतने खुश हुए कि उन्होंने कोलंबस को तब तक खाना खिलाया जब तक कि उसे बचाने के लिए दूसरा जहाज नहीं आ गया।

7/7वैसे तो सभी लोग चंद्रग्रहण का साइंस जानते हैं। फिर भी हम बता देते हैं, जब सूरज, पृथ्वी और चांद एक सीधी लाइन में आ जाते हैं, तो चंद्रग्रहण होता है। इसमें पृथ्वी बीच में आकर सूरज की रोशनी रोक लेती है और चांद पर अपनी परछाई डालती है। इससे चमकता हुआ चांद अंधेरे में छिप जाता है और कभी-कभी प्यारा सा लाल दिखने लगता है। (All Images AI generated)
