1/9दिल्ली जैसे महानगर में, जहां हर दिन लाखों की भीड़ सड़कों और मेट्रो स्टेशनों पर उमड़ती है, एक बच्चे का हाथ छूट जाना किसी भी माता-पिता के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना हो सकता है। दिल्ली पुलिस के गुमशुदा बच्चों के आंकड़े अक्सर हमें इस कड़वी सच्चाई से रूबरू कराते हैं कि लापरवाही की एक छोटी सी चूक कैसे किसी परिवार को उम्र भर का दर्द दे सकती है। बहरहाल, साल 2026 के शुरू होते ही दिल्ली में गुमशुदा बच्चों के आंकड़ों ने ना सिर्फ पेरेंट्स बल्कि पुलिस प्रशासन की भी नींद उड़ा दी है। बता दें, जनवरी माह के पहले 27 दिनों में ही दिल्ली से लगभग 807 लोगों के लापता होने की खबर आई, जिसमें 137 बच्चे शामिल थे। बताया जा रहा है कि अब तक 235 लोग ट्रेस हो चुके हैं लेकिन 538 की तलाश अब भी जारी है।

गुमशुदा बच्चों की खबर से डरने की जगह जागरूकता और स्मार्ट पैरेंटिंग की मदद से आप इस खतरे के खिलाफ मजबूत ढाल बन सकते हैं। एक सुरक्षित भविष्य के लिए हमें अपने बच्चों को सिर्फ पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें भीड़ के बीच खुद को सुरक्षित रखते हुए 'सर्वाइवल' के तरीके भी सिखाने होंगे। आइए जानते हैं कैसे आप अपने बच्चों को सड़क और मेट्रो में सुरक्षित रख सकते हैं।

बच्चे को सिखाएं कि किसी भी अजनबी से कोई खाने की चीज न लें और न ही उनके साथ कहीं जाएं, चाहे वह व्यक्ति आपका दोस्त होने का दावा ही क्यों न करे।

छोटे बच्चों की जेब में हमेशा माता-पिता का नाम, पता और फोन नंबर वाली पर्ची रखें।

घर से निकलने से पहले बच्चे की एक 'फुल-लेंथ' फोटो मोबाइल में जरूर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस को बच्चे के कपड़ों और हुलिए की सटीक जानकारी मिल सके। इसके अलावा बच्चों को सिखाएं कि मुसीबत के समय पुलिस या किसी सुरक्षाकर्मी की मदद लें।

भीड़ में हमेशा बच्चे का हाथ पकड़ें, न कि सिर्फ उनकी उंगली। बच्चे को सिखाएं कि अगर वे मेट्रो में आपसे बिछड़ जाएं, तो वे ट्रेन से न उतरें या वहीं खड़े रहें जहां वे हैं। उन्हें 'यूनिफॉर्म' वाले सुरक्षाकर्मी (CISF) के पास जाने की ट्रेनिंग दें।

बच्चे को कम से कम दो मोबाइल नंबर और घर का पता याद होना चाहिए। छोटे बच्चों की जेब में या उनकी स्कूल बैग की चैन के अंदर अपना संपर्क नंबर और 'ब्लड ग्रुप' लिखा हुआ एक कार्ड हमेशा रखें। बच्चे के बैग में या गले में एक छोटी सीटी (Whistle) लटका सकते हैं। उन्हें सिखाएं कि अगर वे खो जाएं या किसी खतरे में हों, तो जोर-जोर से सीटी बजाएं।

भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाते समय बच्चे को GPS-ट्रैकर स्मार्टवॉच पहनाएं। इससे आप मोबाइल ऐप के जरिए बच्चे की लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं।

अगर बच्चा गुम हो जाए तो बिना समय खराब किए तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं। इसके बाद 100 या 112 नंबर पर कॉल करें। इसके अलावा भारत सरकार के ट्रैक-चाइल्ड पोर्टल पर बच्चे की जानकारी अपलोड करें। स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया का सहारा लें, लेकिन अपना पर्सनल नंबर सार्वजनिक करते समय सावधान रहें।
