1/8तलाक हर कपल के लिए एक कठिन फैसला होता है। शुरुआत में भले ही यह राहत भरा लगता हो लेकिन कुछ समय बाद ज्यादातर कपल्स को गहरे पछतावे में डाल देता है। तालाक पर हुए विभिन्न अध्ययनों और व्यक्तिगत कहानियों से पता चलता है कि 30 प्रतिशत से 80 प्रतिशत लोग तलाक लेने के अपने फैसले पर पछतावा महसूस करते हैं। आइए जानते हैं तालाक लेने के बाद आखिर किन बातों को सोचकर कपल्स अकसर अपने फैसले पर पछतावा महसूस करते हैं।

तलाक के बाद बच्चे दो घरों के बीच बंट जाते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। माता-पिता अक्सर पछताते हैं कि उन्होंने परिवार की एकजुटता को प्राथमिकता नहीं दी। एक पिता ने कहा, 'मेरी सबसे बड़ी गलती बच्चों पर ध्यान न देना था, वे अब भी संघर्ष कर रहे हैं'।

संपत्ति बंटवारे, एलिमनी और कानूनी खर्चों से जीवनयापन मुश्किल हो जाता है। कई लोग पछताते हैं कि उन्होंने विवाह से पहले वित्तीय सुरक्षा की योजना नहीं बनाई। एक सर्वे में 27 प्रतिशत महिलाओं ने वित्तीय असुरक्षा को सबसे बड़ा पछतावा बताया।

तलाक के बाद लोग महसूस करते हैं कि उन्होंने धोखा, गुस्सा या लापरवाही से रिश्ता बिगाड़ा। एक व्यक्ति ने लिखा, 'मैंने अपनी गलतियों को स्वीकार न करके खुद को और ज्यादा दुख दिया'। यह पछतावा बाद की रिलेशनशिप्स में भी दोहराया जाता है।

तालाक लेने के बाद साथ देखे हुए सपने जैसे यात्रा, घर या रिटायरमेंट टूट जाते हैं, जो बाद में अकेलेपन का कारण बनते हैं। एक महिला ने शेयर किया, 'मैंने सोचा था तालाक के बाद आजादी मिलेगी, लेकिन अब पुराने सपनों की याद सताती है'।

बिना सोचे-समझे तलाक लेने से कानूनी पछतावा होता है। तलाक लेने वाली एक महिला का कहना था कि तलाक लेने के दो साल बाद यह अहसास हुआ कि गुस्से में लिया गया तालाक का फैसला गलत था, अब कोई भी नया साथी पुराने जैसा नहीं मिला।

तलाक से पहले किसी प्रोफेशनल से काउंसलिंग लें। बच्चों को प्राथमिकता देते हुए को-पैरेंटिंग पर फोकस करें। वकील से सलाह लेकर संपत्ति और एलिमनी तय करें। खुद पर काम करते हुए अपनी कमियों को सुधारें ताकि भविष्य बेहतर बन सके। फैसला लेने से पहले सोचें, क्योंकि तलाक स्थायी होता है।

कई लोग सोचते हैं कि वे काउंसलिंग या संवाद की कमी से चूक गए। एक अध्ययन के अनुसार, ज्यादातर पछतावे वाले लोग कहते हैं कि वे और प्रयास कर सकते थे। उदाहरण के लिए, एक महिला ने बताया कि तलाक के बाद उसे एहसास हुआ कि छोटी-छोटी बातों पर समझौता करके रिश्ता बचाया जा सकता था।
