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यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां

यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
बर्लिन में मैडम टुसाड्स संग्रालय में एन फ्रेंक का मोम का पुतला रखा गया। उनका पूरा नाम एनिलीस मैरी फ्रेंक था। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में डायरी ऑफ ए यंग गर्ल लिखी थी।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
एन फ्रेंक यहूदी थी। 1942 में एन फ्रेंक और उनके परिवार को नाज़ियों के कब्ज़े के दरम्यान दो साल तक छिपे रहना पड़ा। इसी दौरान वह डायरी लिखा करती थीं।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
कुछ समय बाद उनके परिवार को जर्मन खुफ़िया पुलिस गेस्टापो ने पकड़ लिया और उसके परिवार को पोलैंड स्थित कंसंट्रेशन कैंप में भेज दिया। वहां एन की मां मर गई। बाद में उनकी बहन और एन दोनों टायफॉयड से मर गईं।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
जब जर्मन हटे, रूसियों ने उस क्षेत्र को आज़ाद करवाया तब एन की डायरी मिली। उनके पिता ऑटो फ्रैंक ने इसे प्रकाशित करवाया। द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल का पचासों भाषाओं में अनुवाद हुआ है। इसे सर्वाधिक लोकप्रिय डायरी में शुमार किया जाता है।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
बर्लिन में मैडम टुसाड्स संग्रालय में एन फ्रेंक का मोम का पुतला रखा गया। उनका पूरा नाम एनिलीस मैरी फ्रेंक था। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में डायरी ऑफ ए यंग गर्ल लिखी थी।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
एन फ्रेंक यहूदी थी। 1942 में एन फ्रेंक और उनके परिवार को नाज़ियों के कब्ज़े के दरम्यान दो साल तक छिपे रहना पड़ा। इसी दौरान वह डायरी लिखा करती थीं।
यहूदी परी एन फ्रेंक की दास्तां
कुछ समय बाद उनके परिवार को जर्मन खुफ़िया पुलिस गेस्टापो ने पकड़ लिया और उसके परिवार को पोलैंड स्थित कंसंट्रेशन कैंप में भेज दिया। वहां एन की मां मर गई। बाद में उनकी बहन और एन दोनों टायफॉयड से मर गईं।
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