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आओ राजनीति करें: देखें अपनी प्राथमिकताओं के लेकर क्या कहते हैं रांची के अधिवक्ता

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो
महिलाओं की सुरक्षा इस शहर का सबसे बड़ा मुद्दा है। जब तक लड़कियां घर नहीं पहुंच जाती हैं, अभिभावक चिंतित रहते हैं। नए वकीलों के लिए प्रोत्साहन राशि के साथ इंश्योरेंस और मेडिक्लेम की व्यवस्था भी होनी चाहिए। -शुभांगी शर्मा
आज सभी के लिए अलग से बजट है, लेकिन अधिवक्ताओं के लिए न तो बजट है और न बजट में किसी प्रकार की कोई राशि का प्रावधान है। न उन्हें किसी प्रकार की बीमा शामिल किया जाता और न ही रिटायरमेंट के बाद उन्हें किसी प्रकार का लाभ मिलता है। -कुंदन प्रकाशन
अधिवक्ता सुरक्षा एक्ट लागू किया जाए। वकीलों के लिए अलग से भत्ता की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार में दर्जनों अधिवक्ता शामिल हैं लेकिन उनकी हित को सोचने वाला कोई नहीं है। यही नतीजा की इस पेशे में आने के बाद भी युवा बेरोजगार महसूस करते हैं। -अजय कुमार तिवारी
सामाजिक सुरक्षा के साथ अन्य राज्यों की तरह झारखंड में भी वकील सुरक्षा कानून लागू होना चाहिए। वकीलों के साथ पुलिस गलत व्यवहार करती है। वकील कानून का हवाला दके हैं, लेकिन पुलिस नहीं सुनती और मारपीट पर उतारू हो जाती है। इसलिए सुरक्षा कानून जरूरी है। -प्रदीप नाथ तिवारी
सरकार को वकील की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। बुरा तो तब लगता है जब पुलिस अधिवक्ताओं से भी अन्य की तरह व्यवहार करती हैं। अधिवक्ताओं की सुविधा का ख्याल फिलहाल किन्हीं को नहीं है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। -राजेंद्र प्रसाद गुप्ता
सुरक्षा महिला की सबसे बड़ी चिंता है। कोर्ट परिसर से लेकर रास्ते तक इन्हें अलग-अलग कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बिना किसी मासिक वेतन के ये काम करते हैं। युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में सरकार को सोचना चाहिए। -विभा कुमारी
अधिवक्ताओं के लिए एक विशेष बजट का प्रावधान होना चाहिए। इनके लिए अलग से पेंशन, सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू हो। फिलहाल अधिवक्ताओं की इस समस्या के समाधान पर किसी का ध्यान नहीं है। नए अधिवक्ताओं के लिए भी कोई योजना नहीं है। -मो. जकावत निगार
नए वकीलों के लिए हर महीने 10 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि मिले। पत्रकारों व अन्य सरकारी कर्मियों की तरह रांची में वकीलों के लिए भी कॉलोनी की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के घर का सपना पूरा हो सके। -सबिता सिंह
राज्य में 10 फीसदी अधिवक्ता ही ऐसे होंगे, जो अपनी आमदनी से अपना परिवार चलाने में सक्षम हैं, लेकिन किसी सरकार को इसकी चिंता नहीं है। सरकार को अधिवक्ताओं के लिए मेडिक्लेम और बीमा के साथ प्रोत्साह राशि के लिए बजट में अलग से राशि का प्रावधान करना चाहिए। -संजय कुमार विद्रोही
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  • Web Title:Aao rajiniti karen see what is called Ranchis advocate regarding its priorities