Hindi Newsफोटोहिंदू धर्म: भोजन करने से पहले इन नियमों का करें पालन, मां अन्नपूर्णा की कृपा से होगी तरक्की

हिंदू धर्म: भोजन करने से पहले इन नियमों का करें पालन, मां अन्नपूर्णा की कृपा से होगी तरक्की

हिंदू धर्म में भोजन को अन्नपूर्णा माता का प्रसाद माना गया है। भोजन करने से पहले अगर कुछ नियमों का पालन किया जाए, तो मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और जीवन में तरक्की और समृद्धि की वर्षा करती हैं। ये नियम शास्त्रों में लिखे हैं और इनका पालन करने से भोजन पवित्र हो जाता है। आइए जानें इन नियमों को।

Navaneet RathaurDec 21, 2025 06:39 pm IST
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हाथ-पैर धोकर भोजन करें

भोजन से पहले हाथ-पैर और मुंह अच्छे से धो लें। इससे दिन भर की धूल-मिट्टी और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। शास्त्रों में लिखा है कि अशुद्ध शरीर से ग्रहण किया भोजन रोग और दरिद्रता लाता है। साफ-सुथरे होकर भोजन करने से मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है और भोजन शरीर को पोषण देता है।

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जमीन पर बैठकर भोजन करें

कुर्सी-टेबल पर नहीं, जमीन पर किसी आसन पर बैठकर भोजन करें। इससे पृथ्वी माता से जुड़ाव होता है और भोजन में स्थिरता आती है। ऊंचे स्थान पर खाने से अहंकार बढ़ता है और धन नहीं टिकता है। जमीन पर बैठने से भोजन का पूरा रस शरीर को मिलता है और मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।

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भोजन से पहले यह मंत्र बोलें

भोजन शुरू करने से पहले यह मंत्र बोलें - 'ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शांति शांति शांतिः।' इससे भोजन में दिव्य ऊर्जा आती है और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलता है। मंत्र जपने से मन शांत होता है और भोजन पवित्र प्रसाद बन जाता है।

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थाली में अन्न ना छोड़ें

थाली में उतना ही भोजन लें, जितना आप खा सकें। कभी जूठन ना छोड़ें। जूठन छोड़ने से मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं और घर में दरिद्रता आती है। पूरा भोजन करने से संतोष मिलता है और अगले भोजन में बरकत होती है। यह नियम पालन करने से जीवन में कभी अन्न की कमी नहीं होती है।

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थाली के चारों ओर जल छिड़कें 

भोजन शुरू करने से पहले थाली के चारों ओर जल छिड़कें। इससे थाली में दिव्य ऊर्जा आती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। यह छोटा सा कार्य मां अन्नपूर्णा को बहुत प्रिय है। जल छिड़कते समय मन में 'ॐ श्रीं ह्रीं अन्नपूर्णायै नमः' बोलें। इससे भोजन अमृत समान हो जाता है।

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सही दिशा में मौन रहकर भोजन करें

भोजन हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके करें। इससे सूर्य और कुबेर की कृपा मिलती है। भोजन करते समय बात नहीं करें, मौन रहें। बात करने से भोजन का रस कम हो जाता है और अपाचन होता है। मौन से भोजन का पूरा आनंद मिलता है और मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।

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भोजन के बाद वज्रासन और मंत्र

भोजन पूरा होने के बाद यह मंत्र बोलें - 'अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम। भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं।। अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।' फिर वज्रासन में 5-10 मिनट बैठें। इससे भोजन अच्छे से पचता है और मां अन्नपूर्णा की कृपा से तरक्की होती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।