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World Blood Donor Day 2019 : रक्तदान के फायदे हैं अनेक

हिन्दुस्तान फीचर टीम, नई दिल्ली
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विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। रक्तदान दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि जरूरतमंदों के लिए समय पर रक्त उपलब्ध कराकर उनका मूल्यवान जीवन बचाया जा सके। इस मौके पर रक्तदान के फायदों के बारे में जानकारी दे रहे हैं मनोज कुमार शर्मा रक्तदान को महादान कहा जाता है। इससे बीमारों और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को तो सहायता मिलती ही है, मुश्किल के समय में हमें और हमारे अपनों को भी उसका लाभ मिलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यदि किसी देश की एक प्रतिशत जनसंख्या भी रक्तदान करती है, तो उस देश के रोगियों को रक्त की पर्याप्त आपूर्ति हो जाएगी। सबसे जरूरी यह समझना है कि रक्त बाजार में नहीं मिलता, बल्कि इसकी आपूर्ति दान के रक्त से ही संभव है। यही नहीं, रक्तदान करने वाला भी नुकसान में नहीं रहता। इससे उसकी भी सेहत सुधरती है और शारीरिक तंत्र तरोताजा हो जाता है।
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सुरक्षित है रक्तदान रक्त संग्रह के लिए इस्तेमाल होने वाले बैग में एक बार इस्तेमाल होने वाली सुई लगी होती है, जो तुलनात्मक रूप से पूर्णत: सुरक्षित है। यह प्रक्रिया हमेशा योग्य और प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा पूरी की जाती है। इसलिए रक्तदान लगभग पूरी तरह सुरक्षित है। रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता, क्योंकि हमारे शरीर की अस्थिमज्जा (बोनमैरो) में रक्त का निर्माण लगातार होता रहता है। रक्तदान में किसी प्रकार का दर्द नहीं होता। न ही दाता के शरीर से एक बार में रक्त की इतनी मात्रा ली जाती है कि वह उसके लिए नुकसानदेह हो। उसके भार के आधार पर 350 मिलीलीटर से 450 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। इसलिए रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है।
रक्तदान से लाभ रक्तदान से न केवल किसी जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचती है, बल्कि रक्तदान करने वाले की सेहत पर भी रक्तदान के कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इसलिए इसे सेहत का रिटर्न गिफ्ट भी कहते हैं। - रक्तदान करने से कार्डियोवॉस्क्युलर स्वास्थ्य सुधरता है, क्योंकि नियमित रूप से रक्तदान करने से रक्त में आयरन का स्तर, विशेषकर पुरुषों के लिए कम हो जाता है, जिससे हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। - इससे गंभीर कार्डियोवॉस्क्युलर बीमारियों जैसे स्ट्रोक की आशंका भी कम हो जाती है। - रक्तदान के कारण नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण बढ़ जाता है। - रक्तदान से लिवर, फेफड़े, आंत, पेट और गले के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। - रक्तदान से शरीर में रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। इसकी भरपाई करने के लिए शरीर बोनमैरो को नई लाल रक्त कणिकाएं बनाने के लिए प्रेरित करता है। इससे शरीर में नई कोशिकाएं बनती हैं और शारीरिक तंत्र तरोताजा हो जाता है।
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गलत धारणाएं रक्तदान से जुड़ी कई गलत धारणाओं के कारण लोग रक्तदान करने से कतराते हैं, जिससे कई बार जरूरतमंद व्यक्तियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रक्तदान से जुड़ी कुछ ऐसी गलत धारणाएं हैं, जिनका कोई चिकित्सकीय आधार नहीं है। जैसे धारणा है कि उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग रक्तदान नहीं कर सकते। लेकिन हकीकत है कि जब तक रक्तदाता का रक्तचाप रक्तदान के समय 160 सिस्टोलिक (पहला नंबर) और 100 डायस्टोलिक (दूसरा नंबर) होता है, तब तक रक्तदान किया जा सकता है। धारणा है कि जिनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होता है, वे रक्तदान नहीं कर सकते। वास्तविकता यह है कि यदि दवा लेने के बाद कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रण में है, तो रक्तदान किया जा सकता है। धारणा है कि एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता। हकीकत है कि रक्तदान के पहले हीमोग्लोबिन की मात्रा जांची जाती है। अगर हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य है, तो रक्तदान किया जा सकता है। धारणा है कि रक्तदान से संक्रमण हो जाता है, जबकि हकीकत है कि रक्तदान के लिए जिस बैग का उपयोग किया जाता है, उनमें एक बार उपयोग होने वाली सुईं लगी होती है। यानी खतरा न के बराबर होता है।
कौन कर सकता है रक्तदान रक्तदान दो प्रकार से किया जाता है। पहला, कोई व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर सकता है, ताकि उसके रक्त का किसी जरूरतमंद की जान बचाने में उपयोग किया जा सके। दूसरा, जब जरूरतमंद व्यक्ति के सगे-संबंधी सीधे तौर पर उसके लिए रक्तदान करें। किसी व्यक्ति को तीन महीने में एक बार से अधिक रक्तदान नहीं करना चाहिए और ब्लड बैंक को भी किसी ऐसे व्यक्ति का रक्त नहीं लेना चाहिए, जिसने रक्तदान का अंतराल पूरा न किया है। - 18-60 वर्ष के स्वस्थ लोग रक्तदान कर सकते हैं। - जिन लोगों ने टैटू गुदवाया हो, वे टैटू गुदवाने के एक साल बाद रक्तदान कर सकते हैं। - रक्तदान करने वाले का एक से अधिक पार्टनर से शारीरिक संबंध नहीं होना चाहिए। - रक्तदाता का भार 45 किलो से कम नहीं होना चाहिए। - रक्तदान करने वाले को श्वसन, त्वचा या हृदय से संबंधित बीमारी नहीं होनी चाहिए। - यदि महिला रक्तदान कर रही हो, तो वह पिछले छह हफ्तों में गर्भवती नहीं हुई हो। - दाता के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम/डीएल से कम न हो। - रक्तदान के पहले छह महीने तक सर्जरी न हुई हो। - दाता तीन वर्षों से पीलिया की चपेट में न आया हो।
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- हर दो सेकंड में किसी एक व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है। - अस्पताल में भर्ती होने वाले प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है। - रक्तदान के बाद हुई प्लाज्मा की कमी एक घंटे के भीतर और लाल रक्त कणिकाओं की लगभग चार सप्ताह में पूरी हो जाती है। - रक्तदान से हुई आयरन की कमी आठ सप्ताह में पूरी हो जाती है। - रक्तदान करने से शारीरिक शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। - डॉक्टर कार्ल लैंडस्टेनर ने 1901 में प्रमुख ब्लड ग्रुप्स ए, बी, एबी और ओ की खोज की थी। - रक्त शरीर के भार का 7 प्रतिशत होता है।
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कैसे कार्य करते हैं ब्लड बैंक दाता में कितना रक्त है, यह देखने के बाद उसका हीमोग्लोबिन, पल्स रेट, रक्तचाप, वजन आदि देखा जाता है। फिर उससे प्रश्नावली में जवाब लिखवाए जाते हैं कि उसे कोई बीमारी तो नहीं है। इसके बाद उसे रक्तदान करने के लिए फिट घोषित कर दिया जाता है। रक्त लेने के बाद उसे 15-20 मिनट आराम करने का कहा जाता है। इसके बाद उसे जूस, बिस्कुट आदि दिया जाता है। उसे सलाह दी जाती है कि वह अपना ध्यान रखे, 48 घंटे तक थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीता रहे। ब्लड बैंक में रक्त को दो तरह के बैग में एकत्र किया जाता है। सिंगल बैग में 350 मिलीलीटर रक्त आ जाता है। इससे बड़े बैग में 450 मिलीलीटर रक्त एकत्र किया जाता है। इससे रक्त के अवयवों को अलग कर उसे संरक्षित किया जाता है। रक्त को तीन भागों (लाल रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा और प्लेटलेट) में विभाजित किया जाता है। श्वेत रक्त कणिकाओं को संरक्षित नहीं करते, क्योंकि वे इस्तेमाल में नहीं आती हैं। जितने रक्त की प्रतिवर्ष आवश्यकता होती है, उसका केवल 10 प्रतिशत दाताओं से प्राप्त होता है, जबकि उम्मीद की जाती है कि शत-प्रतिशत रक्त दाताओं से ही हासिल हो। (फरीदाबाद स्थित एशियन हॉस्पिटल के पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा रानी से की गई बातचीत पर आधारित)
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