1/10अक्सर हम अपनी सेहत का ध्यान खानपान और एक्सरसाइज तक ही सीमित रखते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि हमारा घर और उसमें इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की चीजें भी स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन के अनुसार, कई ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें हम सालों तक बिना बदले इस्तेमाल करते रहते हैं और वही चीजें धीरे-धीरे शरीर के लिए नुकसानदेह बन जाती हैं। टूथब्रश, अगरबत्ती, परफ्यूम, किचन के बर्तन या सफाई से जुड़ी चीजें - ये सभी दिखने में आम हैं, लेकिन गलत इस्तेमाल या समय पर ना बदलने पर सेहत को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस लेख में जानिए घर के उन साइलेंट हेल्थ हैजर्ड्स के बारे में, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

पुराने टूथब्रश की ब्रिसल्स में बैक्टीरिया और कीटाणु जमा हो जाते हैं जिससे मुंह की सफाई ठीक से नहीं हो पाती। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार हर तीन महीने में या बीमारी के बाद टूथब्रश बदलना जरूरी है।

अगरबत्ती की खुशबू भले ही मन को सुकून दे, लेकिन इसका धुआं घर की हवा को प्रदूषित करता है। इससे सांस संबंधी समस्याएं और एलर्जी बढ़ सकती हैं। सीमित इस्तेमाल और वेंटिलेशन बेहद जरूरी है।

घर की बालकनी या छज्जे पर बने पक्षियों के घोंसले और उनकी बीट से फंगल स्पोर्स निकलते हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना और एंट्री पॉइंट बंद करना चाहिए।

लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड पर चाकू के कट्स में बैक्टीरिया फंस जाते हैं। समय के साथ यह फूड कंटैमिनेशन का कारण बन सकता है। स्टील या ग्लास बोर्ड बेहतर विकल्प माने जाते हैं।

परफ्यूम में मौजूद केमिकल्स शरीर के हार्मोनल सिग्नल्स को डिस्टर्ब कर सकते हैं। ज्यादा और बंद जगह में परफ्यूम स्प्रे करने से बचना चाहिए, खासकर बच्चों और अस्थमा मरीजों के आसपास।

सुगंधित मोमबत्तियां जलने पर सूट और टॉक्सिक पार्टिकल्स छोड़ती हैं, जो फेफड़ों को इरिटेट कर सकते हैं। इनका इस्तेमाल कभी-कभार करें और कमरे में हवा का सही प्रवाह रखें।

हेयर ब्रश और कंघी में तेल, धूल और माइक्रोब्स जमा हो जाते हैं। इन्हें हफ्ते में एक बार साफ करना और साल में एक बार बदलना स्कैल्प हेल्थ के लिए जरूरी है।

किचन चिमनी में जमा तेल और धुआं सांस की नलियों को इरिटेट कर सकता है। चिमनी के फिल्टर्स की नियमित सफाई ना करने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है।

पुराने प्रेशर कुकर और टिफिन बॉक्स की रबर सील समय के साथ खराब होकर खाने में मिल सकती है। न्यूट्रिशनिस्ट सलाह देती हैं कि कुकर की गैसकेट हर साल बदलें और घिसी सील तुरंत फेंक दें।
