DA Image

अगली फोटो

जुकाम को प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा इन टिप्स से करें काबू में

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
flu
मौसम बदलने से कई बीमारियां उत्पन्न होती हैं, जिनका मूल कारण कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता या अन्य आहार-विहार आदि में सावधानी का अभाव है। इनमें सर्दी-जुकाम होना सबसे सामान्य बात है। साधारण-सी लगने वाली ये बीमारी हमें परेशान कर सकती है। अर्थात समय पर यदि उपचार ना किया जाए, तो ये दमा और टीबी जैसे भयंकर रोग में परिवर्तित हो सकती है। प्राकृतिक चिकित्सा में इसका सरल उपाय है। बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, टॉन्सिल, इंफ्लुएंजा आदि की समस्या आम हो जाती है, लेकिन इस स्थिति में लापरवाही करने से रोगी की स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में शुरुआती स्थिति में ही प्राकृतिक चिकित्सा के तहत क्या-क्या उपाय करें, जानकारी दे रहे हैं वेलनेस केयर निदेशक डॉ. राजेश बतरा:
Eye Problems, Yoga, Yoga for Eyes, Easy Yoga, Eye Care
कारण व लक्षण ये एक संक्रामक रोग है, जो गलत आहार- विहार, अपच, कब्ज, धूल, प्रदूषण, व्यायाम का अभाव, अधिक खाने, सर्द-गर्म का सामना करने से होता है। लक्षणों में छींक का आना, आखों व नाक से पानी बहना, नाक या गले में खुजली होना, रात को खांसी का बढ़ना, ठंड लगना, सिर में दर्द या भारीपन होना, बुखार होना, सांस लेने में कठिनाई होना आदि शमिल हैं।
flu
इंफ्लुएंजा यह एक संक्रामक रोग है। यह श्वास प्रणाली के ऊपरी हिस्से को ज्यादा प्रभावित करता है। इसके तहत बुखार में ठंड लगना, सिर तथा अन्य मांसपेशियों में दर्द होना, नाक और गले में सूजन आ जाना, नाक और आंखों से पानी आना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। 102 डिग्री बुखार दो-तीन दिनों तक बना रहता है, जो कभी-कभी 104 डिग्री तक चला जाता है।
neem
प्राकृतिक चिकित्सा ’नीम के गुनगुने पानी का एनीमा एक-एक दिन छोड़कर लें। ’पेट व माथे, हाथ व पैर के तलवों पर मिट्टी की पट्टी रोजाना या सप्ताह में दो बार लें तथा इसके बाद पेट व कमर पर गर्म- ठंडा सेंक लें। दो गिलास पानी पीकर सिर पर भीगा तौलिया रखकर गर्म कटि स्नान लें, जल नेति करें । ’बुखार अधिक हो, तो पेट और माथे पर ठंडी गीली सूती कपड़े की पट्टी रखें। शरीर का स्पंज करें। ’ठंड या कंपकपी अधिक हो, तो गर्म पाद स्नान लेकर पसीना लाएं। ’4 से 5 तुलसी के पत्ते एक लीटर पानी में कुतर कर डाल दें। इसे बार-बार पीते रहें, शरीर का तापमान भी कम होगा, शुद्धि भी होगी और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी । ’बुखार के रोगी को बार-बार पानी पीना चाहिए। अप्राकृतिक अथवा जंक फूड से बचें। विश्राम करने के साथ-साथ हल्का सुपाच्य व पौष्टिक आहार लें व मन प्रसन्न रखें।
fruits
प्राकृतिक उपचार खांसी-जुकाम से निजात पाने के लिए बिना अंग्रेजी दवा के उपचार संभव है। खांसी-जुकाम का उपचार ’आंखों, गले व पेट पर मिट्टी की पट्टी रखें व 25 मिनट बाद इसें हटाकर एनीमा लें। जुकाम व खांसी का मूल कारण बड़ी आंतों में मल का प्रभाव बढ़ना है। एनीमा इसका अच्छा उपचार है। ’सुबह खाली पेट कुंजल क्रिया व गुनगुने पानी में हल्का नमक डालकर जल नेति करें। ’गर्म पानी का पाद स्नान यानी फुट बाथ लें। ’थोड़ी देर धूप व खुली हवा लें। ’छाती व पीठ पर सूखा घर्षण करें। ’एक दिन का पूरा उपवास रखें। इस दौरान केवल गर्म पानी पिएं या रसाहार लें। यह संभव ना हो, तो फलाहार व रसाहार दोनों पर उपवास कर सकते हैं। ’सूर्यनमस्कार, वीर भद्रासन, पश्चिमात्तानासन, गौमुखासन, सर्वांगासन, पवनमुक्तासन व मर्कटासन लाभकारी हैं। सूर्यभेदन, भस्त्रिका, उज्जायी, कपालभाति प्राणायाम आदि का भी नियमित अभ्यास करें । टॉन्सिल टॉन्सिल का मूल कारण गलें में संक्रमण होने से वहां पर विजातीय द्रव्यों का इकट्ठा होना है। क्या हैं प्राकृतिक उपचार ऊपर बताए सारे उपचार इसमें भी कारगर हैं। इनके अलावा नाक में 5-5 बूंद बादाम तेल सुबह में डालकर नस्यम करें। पानी में अमृतधारा की दो बूंद डालकर या सादे पानी की भाप लें। आटे में थोड़ी-सी काली मिर्च मिलाकर रोटी पकाकर सेवन करें। जरूरत से अधिक भोजन ना करें।
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Take Thought Through Natural Remedies With These Tips