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6 मई, 2021|5:26|IST

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निमोनिया को न समझें साधारण, ये हैं निमोनिया के लक्षण

pneumonia
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निमोनिया हो जाना आजकल आम बात है, पर यह बीमारी उतनी साधारण है नहीं, जितनी आसानी से लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। खासकर बच्चों के लिए तो यह और भी खतरनाक साबित होती है। अपोलो हॉस्पिटल के फिजिशियन डॉ. अभिषेक शुक्ला कहते हैं कि यह एक जानलेवा बीमारी है, इसलिए जैसे ही इसका पता चले, इसका इलाज करा लेना चाहिए। क्या हैं कारण निमोनिया का प्रमुख कारण स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया नाम का एक बैक्टीरिया होता है, जो हमारे फेफड़ों को संक्रमित कर हमारी श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। कभी-कभी किसी फ्लू वायरस, परजीवी और फफूंद की वजह से भी निमोनिया हो सकता है। अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो आप जल्दी ही इसकी चपेट में आ सकते हैं। इस बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही के आकड़ों के अनुसार, हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 110,000 बच्चे इस बीमारी से मर जाते हैं।

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निमोनिया को पहचानें हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल कहते हैं कि खांसी और जुकाम के साथ कफ कई बार बड़ी परेशानी का सबब बनकर निमोनिया का रूप ले लेता है, जो एक संक्रमण है। निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया, फफूंद व परजीवी के कारण होने वाला रोग है। यह सब श्वास के द्वारा फेफड़ों में पहुंचकर संक्रमण कर देते हैं। स्ट्रेप्टोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण यह सबसे अधिक फैलता है। इस संक्रमण में एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों में द्रव या मवाद भर जाता है और सूजन आ जाती है, जिससे बलगम या मवाद वाली खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

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निमोनिया के लक्षण ’लगातार खांसी आना इसका मुख्य लक्षण है। बैक्टीरियल निमोनिया में हरे या पीले रंग का थूक निकलता है। ’फेफड़े के उतकों में इसके रोगाणुओं के संक्रमण के कारण कभी-कभी थूक में खून के धब्बे भी दिखते हैं। ’लेजिनोला निमोनिया में खूनी बलगम भी आता है। ’निमोनिया में बच्चों को तेज ठंड के साथ तेज बुखार आता है, जो लगभग 100 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा भी चला जाता है। बड़े लोगों में बुखार की तीव्रता कम होती है। ’निमोनिया फेफड़ों के वायु छिद्रों पर अटैक करते हैं, जिससे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगती है। ’संक्रमण बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है और ज्यादा खांसने के कारण सीने में दर्द का अनुभव होने लगता है। ’सांसों में तकलीफ के कारण हमारे मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। परिणामस्वरूप कई उम्रदराज लोगों में मतिभ्रम की स्थिति आ जाती है। ’बैक्टीरियल निमोनिया के संक्रमण में कई लोगों को ठंड के साथ आने वाले तेज बुखार में पसीना आते भी देखा गया है। ’बैक्टीरियल निमोनिया में कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो जाती है, जिससे नाखूनों का रंग सफेद और होंठ पीले पड़ जाते हैं। ’ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और पूरे शरीर में कमजोरी होने लगती है।

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बच्चों का दुश्मन डॉ. अभिषेक शुक्ला कहते हैं कि बच्चों में सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक नहीं होने पर यह धीरे-धीरे निमोनिया में बदल जाता है। इस रोग में फेफड़ों में कफ अथवा तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिस कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। शिशुओं और छोटे बच्चों में रेस्पिरेटर्री ंससिशियल वायरस यानी आरएसवी नामक विषाणु वायरल निमोनिया का सबसे आम कारण है। जल्दी-जल्दी सांस लेना, सांस लेने में तेज आवाज आना आदि निमोनिया के लक्षण होते हैं। निमोनिया के लक्षण दिखने पर बच्चों को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं, क्योंकि थोड़ी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। बैक्टीरिया के कारण होने वाले निमोनिया रोग दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकते हैं। दूसरी ओर वायरल जनित निमोनिया ठीक होने में अधिक समय लग जाता है। ’लहसुन को अपने खाने में नियमित रूप से शामिल करें, क्योंकि यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में काम करता है। ’हल्दी को अपने भोजन में जरूर शामिल करेंं, क्योंकि यह निमोनिया को जल्द खत्म करने में सहायक होती है। ’अदरक भी सांस से संबंधित समस्या को दूर करती है। ’तुलसी एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो खराब बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालती है। इसे दिन में 6 बार लेना चाहिए। ’विटामिन सी से युक्त फलों को अपनी डाइट में शामिल करें। ’इस रोग में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। ’गाजर का सेवन आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि फेफड़ों के लिए भी अच्छा होता है। निमोनिया में गाजर का जूस जरूर पिएं। ’इस बीमारी की स्थिति में चीनी के बदले शहद खाएं, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो खराब बैक्टीरिया से शरीर को बचाने में मदद करते हैं। ’जिन्हें निमोनिया हो, उन्हें दूध के बने उत्पादों से दूरी बना कर रखनी चाहिए। इस दौरान काली चाय का सेवन करना चाहिए। ’चुकंदर में काफी ऊर्जा होती है और यह शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करता है। इस बीमारी में आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए। ’निमोनिया होने पर मरीज को सादा भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए। ’निमोनिया के रोगी को मांस, तेल, मसाले और बाहर के खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।

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कैसे हो रोकथाम बच्चे में निमोनिया की आशंका होने पर उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। डॉक्टर बच्चे का कई तरह से परीक्षण करते हैं। जरूरत महसूस करने पर एक्स-रे भी कराते हैं। एक्स-रे से यह पता चल सकता है कि निमोनिया से फेफड़े का कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है। वर्ष में एक बार दिया जाने वाला इन्फ्लूएंजा टीका फ्लू और बैक्टीरियल संक्रमण से तो बचाव करता ही है, यह निमोनिया से भी बचाव करता है। 6 महीने से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति ये टीका लगवा सकता है।

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