DA Image

अगली फोटो

मल्टीपल स्क्लेरोसिस: आखिर क्यों डराती है ये बीमारी

हिन्दुस्तान फीचर टीम, नई दिल्ली
multiple sclerosis
मल्टीपल स्क्लेरोसिस यानी एमएस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली यानी ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की बीमारी है, जिसका समय पर उपचार न कराने से जीना मुश्किल हो जाता है। आगामी 30 मई को मल्टीपल स्क्लेरोसिस दिवस है। इस मौके पर इस बीमारी से बचाव के बारे में बता रही हैं सुषमा कुमारी मल्टीपल स्क्लेरोसिस यानी एमएस का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में व्हील चेयर पर बैठे अपंग व्यक्ति का चित्र उभर आता है। ऐसे व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम खुद नहीं निपटा सकते। पढ़-लिख नहीं सकते। देख-बोल नहीं सकते। यहां तक कि पेशाब आ रहा हो तो बता भी नहीं सकते। यही वजह है कि एमएस का नाम हर किसी के लिए डर का बड़ा कारण बन चुका है।
multiple sclerosis
क्या है यह बीमारी नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. कामेश्वर प्रसाद कहते हैं, एमएस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली यानी ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की एक ऐसी बीमारी है, जो श्वेत रक्त सेल्स (डब्ल्यूबीसी) के एक प्रकार- लिंफोसाइट के प्रतिक्रियावादी होने के कारण होती है। क्यों होता है एमएस डॉ़ प्रसाद एमएस की तुलना नक्सलवादियों से करते हैं। वह कहते हैं कि जिस तरह नक्सलवादी अपने ही घर में हमला करते हैं और कभी-कभार अचानक करते हैं। उसी तरह ब्लड सेल ‘लिंफोसाइट’ भी कभी-कभार अचानक अपने ही ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड में घुसकर इसकी तंत्रिका तारों पर आक्रमण कर इन्हें नष्ट करने लगता है। इससे ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच सूचनाओं का संचार रुक जाता है, जिससे शरीर के अंदर हो रही प्रतिक्रियाओं को महसूस करने में दिक्कत होने लगती है।
multiple sclerosis
लक्षण पहचानने में समस्या यह आक्रमण एक ही बार में लगातार नहीं होता, बल्कि रुक-रुक कर सालों बाद होता है। यह अटैक सामान्यत: एक हफ्ते तक रहता है और कई साल बाद फिर होता है। यही वजह है कि इस बीमारी के लक्षण भी आते-जाते रहते हैं। खास बात यह है कि हर बार यह शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है, जिससे इसकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। डॉ़ प्रसाद कहते हैं, मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड में देखने, बोलने, चलने-फिरने, समन्वय व संवेदना के अलग-अलग केंद्र बिंदु हैं। जिस केंद्र पर हमला होता है, उसी से संबंधित प्रभाव देखने को मिलता है। हर बार शरीर के अलग-अलग अंगों पर प्रभाव पड़ने से मरीज उस अंग के इलाज के लिए संबंधित डॉक्टर के पास जाते हैं, जबकि शरीर के एक से ज्यादा अंगों पर ऐसे अटैक हो रहे हों, तो उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
multiple sclerosis
कारण को जानें इस बीमारी में हर मरीज एक-सा नहीं होता। कई मरीजों को 8-10 साल में अटैक आते हैं, लेकिन वे बिल्कुल सामान्य दिखते हैं, जबकि कुछ मरीज पूरी तरह से बिस्तर पकड़ लेते हैं। हालांकि, कुछ साल बाद इसके अटैक आने बंद हो जाते हैं, लेकिन शरीर के अंगों पर इसका असर देखने को मिलने लगता है। अब तक इसके मरीजों के हालातों में इतना ज्यादा अंतर होने का कारण पूरी तरह से पता नहीं किया जा सका है। माना जाता है कि इसके लिए आनुवंशिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। कैसे होता है इलाज डॉ़ प्रसाद कहते हैं कि यदि इन प्रतिक्रियावादी सेल्स लिंफोसाइट को दवा या स्टेम सेल से शांत कर दिया जाए, तो बीमारी शांत हो सकती है। इन सेल्स को मारकर सही सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। इलाज की यह प्रक्रिया अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण कहलाती है।
multiple sclerosis
डरें नहीं, इलाज कराएं अन्य देशों की तुलना में भारत में इसके मरीजों की संख्या कम है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं एमएस की शिकार ज्यादा होती हैं। इसकी जांच एमआरआई के जरिये की जाती है। डरने की बजाय मरीजों को इसका इलाज करवाना चाहिए। इसका इलाज महंगा है, लेकिन 1000 से 1200 रुपए प्रतिमाह की दवाएं भी इसके इलाज में कारगर हैं। हर साल 30 मई को दुनियाभर में एमएस डे मनाया जाता है, ताकि ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। एमएस के मरीजों को चलने-फिरने, बोलने आदि में दिक्कत होती है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसके मरीजों को कई अन्य समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है। ये परेशानियां अकसर लोगों को नजर नहीं आतीं। यही है 2019 की वल्र्ड एमएस डे की थीम-माइ इनविजिबल एमएस। इस थीम के जरिये लोगों को यह बताने की कोशिश की जा रही है कि एमएस के मरीजों को अतिरिक्त देखभाल के साथ-साथ प्यार और अपनेपन की भी जरूरत होती है। ऐसे हालात में अकसर अपने उनका साथ छोड़ देते हैं। इस बीमारी की वजह से उनकी सेक्स लाइफ पर भी असर होता है, रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं। उनकी पढ़ाई छूट जाती है। काम छूट जाता है, आमदनी खत्म हो जाती है, सामाजिक जीवन खत्म हो जाता है। वे पेशाब नहीं रोक पाते, इसलिए अकसर बाहर जाने से बचते हैं। इसका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखता है। वे हर वक्त तनाव में रहते हैं और थकान महसूस करने लगते हैं। एक अटैक के बाद ही हो जाएं सावधान ’ ध्यान रखें कि शरीर में विटामिन डी की कमी न हो। ’ संतुलित व पोषण से भरपूर आहार लें। खाने में कैल्शियम युक्त भोजन ज्यादा शामिल करें। ’ स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली अपनाएं। इस बात का ध्यान रखें कि वजन न बढ़े। नियमित रूप से व्यायाम और योग करें। इससे एमएस के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ’ डरें नहीं। एमएस का हर मरीज अपंग नहीं होता। 50 प्रतिशत मरीज 10 साल में अपंग होते हैं। दो बार एमएस का अटैक हो चुका हो, तो नियमित रूप से दवाएं लें।
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:know abourt multiple sclerosis treatment and symptoms