
भारत में बच्चों की सेहत की बात आते ही सबसे पहले दूध का जिक्र किया जाता है। अक्सर माना जाता है कि अगर बच्चा ठीक से खाना नहीं खा रहा है तो ज्यादा दूध पिला देना उसकी न्यूट्रिशन की जरूरत पूरी कर देगा। लेकिन पीडियाट्रिशियन डॉ. निमिश कुलकर्णी इस आम सोच को चुनौती देते हैं। उनके अनुसार, जरूरत से ज्यादा दूध बच्चों के लिए फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदायक भी हो सकता है। अत्यधिक दूध पीने से बच्चे का पेट भर जाता है और वह जरूरी ठोस भोजन से दूरी बना लेता है जिससे आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इस लेख में जानिए बच्चों के लिए दूध की सही मात्रा, इसके साइड इफेक्ट्स और हेल्दी डाइट से जुड़े जरूरी टिप्स।

2/8अगर बच्चा 1 साल से ऊपर है और संतुलित, पौष्टिक आहार ले रहा है, तो यह बिल्कुल ठीक है कि वह पूरे दिन दूध ना भी पिए। हां, आपने सही पढ़ा- दूध कोई अनिवार्य फूड नहीं है, अगर डाइट सही है।

3/8ज्यादा दूध पीने से बच्चों का पेट भर जाता है, जिससे उन्हें असली ठोस खाने की भूख नहीं लगती। इसका नतीजा होता है पोषण की कमी, खासकर आयरन डिफिशिएंसी, जो बच्चों में बहुत आम समस्या बनती जा रही है।

4/8डॉ. कुलकर्णी के अनुसार, 1 साल के बाद बच्चों को दिन में अधिकतम 350–500 मिलीलीटर दूध (लगभग 2 कप) ही देना चाहिए। इससे ज्यादा दूध देने की जरूरत नहीं होती।

5/8बच्चों का मुख्य पेट भरना चाहिए एनर्जी-रिच और व्होलसम फूड से- जैसे रोटी, दाल, चावल, सब्जियां, फल और प्रोटीन। यही फूड्स बच्चे के विकास, इम्युनिटी और ब्रेन ग्रोथ में मदद करते हैं।

6/8घर में खाना बनाते समय तेल और नमक कम रखें। बच्चे का हिस्सा मसाले डालने से पहले अलग निकाल लें। इससे बच्चा वही घर का खाना खा पाएगा, जो बाकी परिवार खा रहा है- बिना नुकसान के।

7/8हर बच्चा अलग होता है और उसकी भूख भी अलग। दूध की मात्रा से ज्यादा जरूरी है बच्चे की पूरी डाइट और उसका रिश्ता खाने के साथ। भरोसा रखें और बच्चे के शरीर को खुद संतुलन बनाने दें।

8/8बच्चों को जबरदस्ती खिलाना उनकी भूख और खाने की आदतों को और बिगाड़ देता है। डॉक्टर के अनुसार, जब जंक फूड और एक्स्ट्रा दूध कम किया जाता है, तो बच्चे खुद ठोस खाने की मांग करने लगते हैं।
