
आयुष्मान कार्ड देश के करोड़ों लोगों के लिए इलाज के खर्च का बोझ कम करने वाली अहम सरकारी स्वास्थ्य सुविधा है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत पात्र लाभार्थियों को लिस्टेड हॉस्पिटल में योजना के दायरे में आने वाला इलाज कैशलेस तरीके से लेने की सुविधा दी जाती है। लेकिन कई बार लोगों को अस्पताल में पहुंचने के बाद समस्या का सामना करना पड़ता है। अस्पताल आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करता, इलाज देने से मना कर देता है या योजना के तहत कवर होने वाली सेवा के लिए पैसे मांगता है। ऐसे में मरीज या उसके परिवार को चुप बैठने की जरूरत नहीं है।

2/6सबसे पहले अस्पताल में मौजूद Ayushman Mitra या संबंधित कर्मचारी से बात करें। अगर समस्या वहीं हल नहीं होती और अस्पताल इलाज देने से इनकार करता है, योजना के तहत आने वाले इलाज के लिए पैसे मांगता है या सेवा को लेकर कोई गंभीर शिकायत है, तो आप PM-JAY में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। NHA के आधिकारिक दिशानिर्देशों के मुताबिक beneficiary शिकायतें हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से दर्ज करा सकता है।

3/6Ayushman Bharat PM-JAY का टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14555 है। NHA के अनुसार इस नंबर का इस्तेमाल योजना से जुड़ी जानकारी और शिकायतों के लिए किया जा सकता है। फोन करते समय अपनी समस्या साफ-साफ बताएं। उदाहरण के लिए कहें कि आपके पास Ayushman card है, आप किस अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे, अस्पताल ने किस बात से इनकार किया और क्या आपसे पैसे मांगे गए। शिकायत दर्ज करने के लिए अस्पताल का नाम, मरीज की जानकारी और घटना से जुड़ी जरूरी जानकारी अपने पास रखें। जितनी साफ जानकारी देंगे, उतना ही शिकायत को सही जगह भेजने में मदद मिलेगी।

4/6फोन के अलावा Ayushman Bharat PM-JAY के Central Grievance Redressal Management System (CGRMS) के जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत करते समय आपको अपनी समस्या से जुड़ी जानकारी भरनी होती है। इसमें अस्पताल का नाम और शिकायत की डिटेल देना उपयोगी रहेगा। अगर आपके पास इलाज से जुड़े दस्तावेज, बिल या दूसरे सबूत हैं, तो उन्हें संभालकर रखना भी बेहतर है।

5/6शिकायत दर्ज होने के बाद grievance system में उसका रिकॉर्ड बनाया जाता है। NHA के अनुसार grievance system शिकायत को एक Unique Grievance Number (UGN) देता है और इसकी जानकारी SMS के जरिए भी भेजी जा सकती है। इस नंबर को संभालकर रखें। आगे शिकायत से जुड़ी जानकारी लेते समय यह आपके काम आएगा। यानी शिकायत करने के बाद सिर्फ फोन काट देना ही आखिरी कदम नहीं है। आपके पास शिकायत का नंबर होना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसी शिकायत के बारे में जानकारी ली जा सके।

6/6शिकायत करने से पहले कुछ जरूरी जानकारी अपने पास रखने से प्रक्रिया आसान हो सकती है। जैसे मरीज का नाम, Ayushman card/beneficiary से जुड़ी जानकारी, अस्पताल का नाम, इलाज की तारीख और अस्पताल में सामने आई समस्या। अगर अस्पताल ने पैसे मांगे हैं तो कितनी रकम मांगी गई, किस सेवा के लिए मांगी गई और क्या कोई बिल या रसीद दी गई यह जानकारी भी शिकायत में बताना उपयोगी रहेगा। अगर इलाज से मना किया गया है तो अस्पताल का नाम और यह भी बताएं कि कौन-सी सेवा या इलाज लेने के लिए गए थे।
