
फोन चाहे कितना भी महंगा क्यों न हो, अगर उसके साथ इस्तेमाल किया जाने वाला चार्जर सही नहीं है तो डिवाइस को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। बाजार में इन दिनों बड़ी संख्या में नकली या फेक चार्जर बिक रहे हैं, जो दिखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं। कई बार लोग कम कीमत देखकर ऐसे चार्जर खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बैटरी खराब होने, फोन गर्म होने या चार्जिंग स्पीड कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

2/7नकली चार्जर सिर्फ फोन की बैटरी को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि कई मामलों में आग लगने और शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं। यही वजह है कि किसी भी चार्जर को खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले उसकी असलियत जानना बेहद जरूरी है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आपका चार्जर असली है या नकली, तो यहां बताए गए आसान तरीके आपकी मदद कर सकते हैं।

3/7असली चार्जर की पैकेजिंग आमतौर पर साफ, मजबूत और अच्छी क्वालिटी की होती है। कंपनी का लोगो, मॉडल नंबर और अन्य जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होती है। वहीं नकली चार्जर की पैकिंग पर प्रिंटिंग की क्वालिटी खराब हो सकती है। कई बार स्पेलिंग की गलतियां भी देखने को मिलती हैं। इसलिए पैकेजिंग को ध्यान से चेक करना जरूरी है।

4/7चार्जिंग के दौरान थोड़ा गर्म होना सामान्य बात है, लेकिन अगर फोन या चार्जर जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए। खराब क्वालिटी वाले चार्जर में सुरक्षा सिस्टम कमजोर होता है, जिससे ओवरहीटिंग की समस्या बढ़ सकती है। चार्जर खरीदते समय BIS मार्क, ISI मार्क और अन्य सुरक्षा प्रमाणपत्र जरूर जांचें।

5/7हर असली चार्जर पर इनपुट और आउटपुट रेटिंग, मॉडल नंबर, सर्टिफिकेशन मार्क और कंपनी की जानकारी दी जाती है। अगर चार्जर पर ये जानकारी गायब है या बहुत हल्के तरीके से छपी हुई है, तो यह नकली होने का संकेत हो सकता है।

6/7अगर आपको चार्जर की असलियत पर शक है, तो उसके मॉडल नंबर को कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करें। कई ब्रांड अपने ओरिजिनल एक्सेसरीज की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराते हैं, जिससे असली और नकली प्रोडक्ट में अंतर करना आसान हो जाता है। अगर किसी महंगे ब्रांड का चार्जर बाजार में सामान्य कीमत से बहुत कम दाम पर मिल रहा है, तो सतर्क हो जाएं।

7/7अगर आपका फोन फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है लेकिन चार्जर बहुत धीरे चार्ज कर रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। नकली चार्जर अक्सर कंपनी द्वारा बताए गए चार्जिंग आउटपुट को पूरा नहीं कर पाते। ऐसे में फोन को चार्ज होने में ज्यादा समय लगता है।
