1/7पुराणों में लिखा है कि गौ माता में सभी देवी-देवता निवास करते हैं। हिंदू धर्म में पहली रोटी गाय को खिलाना परंपरा है, क्योंकि इससे कुलदेवता और पितर तृप्त होते हैं। लेकिन जूठा या बासी भोजन दिया जाए, तो यह सभी देवताओं का अपमान होता है। इससे किए गए अन्य पुण्य कर्मों का फल नष्ट हो जाता है और घर में नकारात्मकता बढ़ती है।

ज्योतिष में गाय बृहस्पति ग्रह से जुड़ी है। बृहस्पति ज्ञान, धर्म और भाग्य का कारक है। गाय को अशुद्ध भोजन देने से बृहस्पति कमजोर होता है। भाग्य साथ छोड़ देता है, निर्णय गलत होने लगते हैं, संतान कष्ट बढ़ता है और जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है। श्रद्धा से शुद्ध भोजन ही दें।

गाय लक्ष्मी स्वरूप भी है और शुक्र ग्रह से जुड़ी है। ऐसे में गाय को जूठा या बासी भोजन देने से शुक्र रुष्ट होता है। घर में धन की बरकत रुक जाती है, खर्च बढ़ते हैं और वैभव दूर हो जाता है। रिश्तों में मधुरता कम होती है। गाय को शुद्ध भोजन देने से शुक्र मजबूत होता है और धन टिकता है।

गाय पितरों से जुड़ी है। जूठा या बासी भोजन देने से पितर अप्रसन्न होते हैं। घर में पितृ दोष लगता है। विवाह में देरी, संतान कष्ट, अकारण झगड़े और मानसिक अशांति बढ़ती है। पितरों की शांति के लिए गाय को शुद्ध भोजन ही दें। इससे पितृ दोष शांत होता है।

जूठा और बासी भोजन में नकारात्मक ऊर्जा होती है। गाय को ऐसा भोजन खिलाने से वह ऊर्जा घर में फैलती है। बने-बनाए काम बिगड़ने लगते हैं, रिश्तों में तनाव बढ़ता है और स्वास्थ्य खराब रहता है। गाय को शुद्ध और ताजा भोजन देने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

घर की पहली रोटी या ताजा भोजन गाय को खिलाएं। भाव शुद्ध हो, प्रेम से खिलाएं। बासी रोटी यदि साफ और श्रद्धा से दी जाए तो पुण्य मिलता है, लेकिन जूठा कभी ना दें। गाय को मिर्च-मसाला या सड़ी चीजें ना खिलाएं। इससे गौ माता प्रसन्न होती हैं।

गाय को जूठा या बासी न खिलाएं, श्रद्धा से ताजा भोजन दें। इससे बृहस्पति-शुक्र मजबूत होंगे, पितृ दोष शांत होगा और घर में सुख-शांति आएगी। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
