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Thugs of Hindostan: त्योहारों पर बड़े बैनरों की बड़ी ठगी! इसलिए चुकाने पड़ते हैं ज्यादा दाम

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
 Thugs of Hindostan
लीजिए जनाब, इस गुरुवार को रिलीज हुई ‘ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' को रविवार तक देखने के लिए दर्शकों को आम हफ्तों से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। जी हां, दिवाली का मौका और उस पर से सिर्फ एक बड़ी फिल्म की आवक। यानी पूरा बाजार अपने कब्जे में कर लेने के बाद इस फिल्म की निर्माता कंपनी यशराज की वितरण-टीम ने देश भर के अपने प्रदर्शकों को पिछले दिनों यह निर्देश दिया कि वे अपने नियंत्रण में आने वाले तमाम सिनेमाघरों में टिकटों के रेट इस चार दिन लंबे वीकएंड के लिए बढ़ा दें।
 Thugs of Hindostan
दिवाली, ईद, 15 अगस्त, क्रिसमस जैसे बॉक्स-ऑफिस के लिहाज से गर्म समझे जाने वाले मौकों पर बड़ी फिल्मों के निर्माताओं की निगाहें पहले भी रहती थीं। लेकिन हाल के बरसों में ये मौके जिस तरह ‘हॉट-स्पॉट' में तब्दील हुए हैं, उसे देखते हुए निर्माता अब कई-कई महीने और कभी-कभी तो कई साल पहले से अपनी किसी खास फिल्म को ऐसे खास मौकों पर लाने का ऐलान कर देते हैं। इससे होता यह है कि एक तरफ जहां कोई दूसरा निर्माता उस बड़ी फिल्म के सामने अपनी फिल्म नहीं लाता, वहीं दर्शकों के जेहन में भी काफी पहले से उस फिल्म के प्रति हवा बनने लगती है।
Thugs of Hindostan
लेकिन दिक्कत तब आती है, जब थिएटरों में लगभग एकाधिकार कर लेने के बाद ये लोग उस मौके पर टिकटों के रेट भी बढ़ा देते हैं। यानी एक तरफ तो आम दिनों और आम फिल्मों के मुकाबले ज्यादा लोग उस फिल्म को देखने आएं और दूसरी तरफ वे लोग आम दिनों और आम फिल्मों के मुकाबले ज्यादा पैसे भी खर्च करें। हाल के वक्त में ‘संजू' ‘ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' के अलावा ‘रेस 3', ‘टाइगर जिंदा है', ‘ट्यूबलाइट' जैसी बड़ी फिल्मों की रिलीज पर ऐसा किया गया।
Thugs of Hindostan
फिल्म समीक्षक मुर्तजा अली मानते हैं कि यह सीधे-सीधे ब्लैकमेलिंग है। वह कहते हैं, ‘यह तो वही सिस्टम हो गया, जिसके हम खिलाफ थे कि ब्लैकिए थिएटरों के बाहर बड़ी फिल्मों की टिकटें ब्लैक करते थे। आज वही काम प्रोड्यूसर कर रहे हैं। इससे यह भी लगता है कि निर्माता को अपनी फिल्म पर भरोसा नहीं है, वह जल्दी-जल्दी लोगों की जेब से पैसे खींच लेना चाहता है, जबकि आज भी अच्छी फिल्में तीन-चार हफ्ते तक कमाई करती रहती हैं।' मुर्तजा के मुताबिक, यह एक किस्म का शोषण ही है।
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दूसरी तरफ फिल्म वितरक और प्रदर्शक संजय घई इस चलन को गलत नहीं बताते। वह कहते हैं- बड़ी फिल्म है, बड़ा मौका है तो थोड़े से रेट बढ़ाने में हर्ज ही क्या है। वह बताते हैं कि यशराज ने कोई जबर्दस्ती नहीं की, बस इतना ही कहा है कि ‘ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' की टिकटों के दाम ‘टाइगर जिंदा है' की टिकटों से कम न रखे जाएं। उधर वरिष्ठ फिल्म समीक्षक बॉबी सिंग कहते हैं कि अगर फिल्म वाले त्योहारों पर आने वाली बड़े बजट की फिल्मों के रेट बढ़ाते हैं तो उन्हें छोटे बजट की फिल्मों के रेट कम भी तो करने चाहिए। वैसे देखा जाए तो यह एक किस्म की दादागिरी ही है कि आपको छुट्टियों में फिल्म एन्जॉय करनी है तो बढ़े हुए दाम दीजिए, वरना इंतजार कीजिए।
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  • Web Title:Thugs Of Hindostan thats why will have to pay more to see film on sunday