1/8आज हम आपको एक ऐसे सुपरस्टार के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने हमेशा दर्शकों का दिल जीता है और कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। हालांकि फिर एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने सारी शोहरत और फेम को छोड़ संयासी बनने का फैसला किया। इतना ही नहीं उनके बेटे जो कि एक्टर हैं उन्होंने कभी उनके साथ काम तक नहीं किया।

हम जिनकी बात कर रहे हैं वह हैं विनोद खन्ना। विनेद ने अपने करियर में कई ब्लॉकबस्टर दी थीं और वह बॉलीवुड के बड़े स्टार थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के आखिरी में की फिल्म मन का मीत से। वहीं 1980 के शुरुआत तक वह हिंदी सिनेमा के टॉप स्टार बन गए थे।

हालांकि अपने करियर के पीक पर आकर उन्होंने अचानक ऐसा फैसला लिया जिससे सब हैरान हो गए थे। उन्होंने ओशो रजनीश को फॉलो करते हुए अपना करियर, घर और परिवार तक को छोड़ दिया और ओशो के आश्रम में रहने लगे।

विनोद के इस फैसले से उनके परिवार पर भी बड़ा असर पड़ा था। उनकी पत्नी गीतांजली और दोनों बेटे राहुल और अक्षय खन्ना अकेले पड़ गए थे और फिर 1985 में विनोद और गीतांजली अलग हो गए।

वहीं अक्षय खन्ना इतने टैलेंटेड एक्टर हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ काम नहीं किया। एक इंटरव्यू में अक्षय ने कहा था, कुछ लोग ऐसे हैं जिनके साथ आप काम नहीं कर सकते। मेरे पिता उनमें से एक हैं। उनके साथ एक ही फ्रेम में खड़े होना पॉसिबल नहीं है। उनका स्क्रीन प्रेजेंस काफी पॉवरफुल है।

कई साल आश्रम में रहने के बाद विनोद फिर वापस मुंबई आए और करियर पर कमबैक किया। इतना ही नहीं उन्होंने फिर कविता दफ्तरी से दूसरी शादी की और इनके फिर साक्षी और श्रद्धा बच्चे हुए।

विनोद खन्ना का साल 2017 में निधन हो गया था। आज भले ही वह इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी फिल्में और किरदार आज भी फैंस के दिल में जिंदा हैं।

अक्षय ने एक बार विनोद को लेकर कहा था कि वह उन्हें बतौर सुपरस्टार नहीं बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में याद करते हैं जिन्होंने हमेशा लाइफ अपने हिसाब से जी है।
