1/8आज हम आपको एक ऐसे एक्टर के बारे में बताने वाले हैं जो कभी रजनीकांत के टफ कॉम्पटीशन थे। फिल्मों में जब उनका जादू नहीं चला तो उन्होंने बिजनेस में नाम कमाया। इतना ही नहीं उन्हें लकवा मार गया था और इससे ठीक होकर फिर उन्होंने दमदार वापसी की।

जिस एक्टर की हम बात कर रहे हैं वह हैं तमिल फिल्मों के हीरो अरविंद स्वामी जिन्होंने अपने करियर में कई दमदार परफॉर्मेंस दी है।

अरविंद स्वामी के पैरेंट्स इंडस्ट्रलिस्ट थे। मणिरत्नम ने एक विज्ञापन के दौरान उन्हें स्पॉट किया और फिर फिल्म थलापति का ऑफर दिया जिसमें रजनीकांत और मनमूती थे। हालांकि 1992 में आई फिल्म रोजा और 1995 में आई फिल्म बॉम्बे से उनके करियर में टर्निंग पॉइंट आया।

वहीं पैन इंडिया उन्हें स्टारडम प्रियदर्शन की फिल्म सात रंग के सपने से मिली जिसमें उनके साथ जूही चावला लीड रोल में थीं। फिल्म चली नहीं और सबको लगा अरविंद का करियर यहीं खत्म हो गया।

अरविंद ने फिर अपने पिता की कंपनी को संभालकर दूसरी इनिंग खेलने का फैसला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अरविंद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे। 2005 में उन्होंने फिर अपनी खुद की कंपनी शुरू की।

हालांकि फिर अरविंद की लाइफ में आया भूचाल जब अरविंद की पीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी और इससे उन्हें थोड़ा लकवा मार गया था।

इसके बाद अरविंद ने साल 2013 में अपनी चोट से ठीक होने के बाद कदल से वापसी की। इतना ही नहीं उन्होंने इसके बाद, ध्रुवा, थलाइवी जैसी फिल्में की।

लास्ट अरविंद फिल्म तन्वी द ग्रेट में नजर आए जो हिंदी फिल्म है और इसे अनुपम खेर ने डायरेक्ट किया था।
