इस एक्टर की मौत के बाद रिलीज हुई थीं 10 फिल्में, 'शोले' में निभाया था अहम किरदार

आज हम आपको जिस एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, उनके निधन के बाद एक-दो नहीं, बल्कि 10 फिल्में रिलीज हुई थीं। हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि संजीव कुमार हैं।

Priti KushwahaFeb 09, 2026 11:35 am IST
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'शोले' के इस एक्टर के निधन के बाद रिलीज हुई थी इसकी 10 फिल्में

बॉलीवुड में कई स्टार्स ऐसे हैं, जिनके निधन के बाद उनकी फिल्में रिलीज हुईं। इस लिस्ट मे बॉलीवुड के कई स्टार्स के नाम शामिल हैं। लेकिन आज हम आपको जिस एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, उनके निधन के बाद एक-दो नहीं, बल्कि 10 फिल्में रिलीज हुई थीं। हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि संजीव कुमार हैं। संजीव ने अपने  करियर में 'शोले', 'सीता गीता' और 'त्रिशूल' जैसे में कई शानदार फिल्में दी हैं। 6 नवंबर, 1985 को अभिनेता संजीव कुमार के असामयिक निधन के बाद उनकी 10 फिल्में रिलीज हुई थी। तो चलिए देखे हैं पूरी लिस्ट...

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'कत्ल' (1986)

 संजीव कुमार की मृत्यु के बाद रिलीज होने वाली ये उनकी पहली फिल्म थी।  1986 में रिलीज हुई एक बेहतरीन हिंदी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें संजीव कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई है। इसमें संजीव कुमार ने एक नेत्रहीन व्यक्ति का अभिनय किया है जो अपनी पत्नी (सारिका) के बेवफाई का बदला लेता है।

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'हाथों की लकीरें' (1986)

संजीव कुमार की फिल्म 'हाथों की लकीरें' को दर्शकों ने काफी पसंद की थी। इस फिल्म में संजीव के अलावा जैकी श्रॉफ, प्रिया राजवंश और जीनत अमान लीड रोल में थीं। इस फिल्म को चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया था।

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'बात बन जाए' (1986)

  'बात बन जाए' में संजीव कुमार के अलावा मिथुन चक्रवर्ती, जीनत अमान, अमोल पालेकर, राज बब्बर और शक्ति कपूर जैसे कलाकार हैं। ये फिल्म काफी पसंद की गई थी। मूवी को भरत रंगाचारी ने डायरेक्ट किया था।

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'कांच की दीवार' (1986)

'कांच की दीवार' एम. एन. यासीन द्वारा निर्देशित एक हिंदी ड्रामा फिल्म है, जिसमें संजीव कुमार ने जसवंत सिंह और स्मिता पाटिल ने निशा की मुख्य भूमिका निभाई है। कमल चौधरी द्वारा निर्मित इस फिल्म में अमरीश पुरी और शक्ति कपूर भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। यह एक एक्शन-ड्रामा फिल्म है।

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'लव एंड गॉड' (1986)

लव एंड गॉड 1986 में बनी एक भारतीय हिंदी फिल्म है, जो के. आसिफ द्वारा निर्मित और निर्देशित अंतिम फिल्म थी। यह उनकी एकमात्र ऐसी फिल्म थी जो पूरी तरह से रंगीन थी। इस फिल्म को  "कैस और लैला" के नाम से भी जाना जाता है। इसमें संजीव के अलावा निम्मी, सिम्मी ग्रेवाल, अमजद खान और प्राण जैसे कलाकार थे।

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'राही' (1987)

संजीव कुमार की 'राही' का निर्देशन रमन कुमार ने किया था। फिल्म में संजीव के अलावा शत्रुघ्न सिन्हा और स्मिता पाटिल लीड रोल हैं।

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'दो वक्त की रोटी' (1988)

दो वक्त की रोटी 1988 में बनी एक भारतीय हिंदी फिल्म है, जिसका निर्देशन सतपाल ने किया और निर्माण एमपी अग्रवाल ने किया। इसमें फिरोज खान , संजीव कुमार , रीना रॉय और सुलक्षणा पंडित ने लीड रोल प्ले किया था।  

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'नामुमकिन' (1988)

'नामुमकिन' में संजीव कुमार के अलावा राज बब्बर, विनोद मेहरा, जीनत अमान , ओम शिवपुरी जैसे कलाकार थे। ऋषिकेश मुखर्जी की डायरेक्ट ये एक मिस्ट्री ड्रामा मूवी है।

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'ऊंच नीच बीच' (1989)

वसी खान द्वारा निर्देशित 'ऊंच नीच बीच' एक हिंदी ड्रामा फिल्म है, जिसमें संजीव कुमार, शबाना आजमी, शशि कपूर और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो एक गांव की महिला के रेलवे स्टेशन पर खो जाने और 14 साल तक अपने पति के लौटने का इंतजार करती है।  फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल द्वारा दिया गया है।  

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'प्रोफेसर की पड़ोसन' (1993)

    फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' की शूटिंग के दौरान ही संजीव कुमार का निधन हुआ था, जिसके बाद उनके हिस्से को मनमोहन देसाई की सलाह पर कहानी में बदलाव कर सुदेश भोंसले की मिमिक्री (आवाज) और किसी अन्य कलाकार की मदद से पूरा किया गया था।

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