'सुसाइड का आता था ख्याल', रुबीना ने बताया बेटियों के जन्म के बाद कैसा था हाल?

एक्ट्रेस रुबीना दिलैक ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें सुसाइड के ख्याल आते थे। उन्होंने कहा किपोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में लोगों को खुलकर बात करनी चाहिए।  

Harshita PandeyJun 03, 2026 02:59 pm IST
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रुबीना दिलैक

मां बनने के बाद रुबीना दिलैक को कई मौकों पर मदरहुड (ममता) और मां बनने के बाद महिलाओं में आने वाले बदलावों के बारे में बात करते देखा गया है।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजरीं रुबीना

अब एक बार फिर रुबीना दिलैक ने ऐसे ही एक मुद्दे पर बात की है। रुबीना ने फिल्म विंडो के साथ खास बातचीत में पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि वो भी इस चीज से गुजरी थीं।

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पोस्टपार्टम को बताया सबसे मुश्किल दौर

रुबीना ने कहा कि बेटियों के जन्म के बाद वो भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजरी थीं और वो उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर था। उन्होंने कहा, "मेरे अनुभव में जो सबसे ज्यादा मुश्किल दौर था, वो था पोस्टपार्टम डिप्रेशन। और मैं अभी उस फेज से निकली हूं। मुझे उन महिलाओं के प्रति बहुत सहानुभूति है जो इस दौर से गुजरती हैं। खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने ये सफर अकेले तय किया है।"

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शरीर में महसूस होता था भारीपन

रुबीना ने कहा, "मेरे तीन महीने ऐसे थे कि मुझे ऐसा लगा कि मुझे कुछ खाना नहीं है, मैं किसी से बात नहीं करना चाहती थी। मेरे साथ क्या हो रहा था? मैं वो भारीपन अपने शरीर में महसूस कर पाती थी। आप बहुत ही प्रेरणाहीन महसूस करते हैं, किसी भी चीज को करने का जोश नहीं होता है।"

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क्यों पोस्टपार्टम पर बात नहीं कर पातीं महिलाएं?

रुबीना ने कहा कि इस दौरान उन्हें एक चीज जिससे उन्हें सबसे ज्यादा मदद मिली वो ये थी कि उन्हें पोस्टपार्टम के बारे में जानकारी थी। उन्होंने कहा, "मुझे इस दौर में इस चीज से मदद मिली कि मैं इन चीजों को लेकर जागरुक थी। मुझे लगा कि काउंसलिंग करना बहुत जरूरी है। हम लोगों से बात नहीं करते हैं। हमें अक्सर ये कहकर शर्मिंदा किया जाता है कि ये कौन सी बड़ी बात है यार? मुझे लगता है कि ये आपके दिमाग में हैं। लेकिन ये हमाने दिमाग में नहीं होता है। ये हार्मोनल बदलाव होते हैं, दिमाग में केमिकल रिएक्शन हो रहे होते हैं। हम वो सब महसूस कर रहे होते हैं।

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रुबीना ने ली थी काउंसलिंग

अपनी काउंसलिंग के बारे में बात करते हुए रुबीना ने कहा, "मैंने काउंसलिंग ली थी। मुझे अच्छे से याद है जब मैं अपने न्यूट्रीशियन के बारे में बात करती थी तो मुझे कहा जाता था कि मैं अपने फेज का ध्यान रखूं। जब आपका बच्चा तीन महीने का है, 9 महीने का, डेढ साल का, दो साल का होगा, तब आप और आपकी बॉडी भी उन माइलस्टोन्स का अनुभव करेगी। इस दौरान पोस्टपार्टम आपको सबसे ज्यादा परेशान करता है।"

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दुनिया से कट जाना चाहती थीं रुबीना

रुबीना ने कहा क्योंकि उन्हें इस फेज के बारे में पहले से जानकारी थी, तो उन्हें काफी मदद मिली। उन्होंने कहा- क्योंकि मुझे ये पता था, मैं खुद को बता सकती थी कि ये केवल एक फेज है, जो निकल जाएगा। प्लीज कुछ भी उल्टा-सीधा मत करना जो आप अपने पूरे जीवन पछतावा करो। मुझे सुसाइड के ख्याल आते थे। मुझे ऐसे ख्याल आते थे जहां मैं बस दुनिया से अलग हो जाना चाहती थी।"

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