
फिल्म डबल ऑक्यूपेंसी ओरिजिनल एक तमिल भाषी फिल्म है जिसकी कहानी रजनी नाम के किरदार के इर्दगिर्द होती है। इस किरदार का अनोखा कमाल कहानी में आगे पता चलेगा। इस फिल्म की IMDb पर 6.3 की रेटिंग मिली है।

2/8फिल्म की शुरुआत एक पति-पत्नी से होती होती है जिन्हें 15 साल तक कोई संतान नहीं हुई। फिर देवी की ऐसी कृपा हुई कि दोनों सालों बाद अपने बच्चे के पैदा होने का इंतजार करते हैं।

3/8पत्नी एक बच्चे को जन्म देती है। दोनों बहुत खुश होते हैं। उन्हें लगता है अब उनकी खुशियां आ गई हैं। लेकिन तभी पति ध्यान देता है कि वो बच्चा रो नहीं रहा है। ये जानकर दोनों डर जाते हैं। और बच्चे को बरसते हुए आसमान के सामने उठाकर अपनी देवी से बच्चे को जीवित करने की मांग करते हैं।

4/8देवी दोनों की सुन लेती है और बच्चा कुछ ही पल में रोने लगता है। लेकिन देवी के आशीर्वाद से जीवित हुए इस बच्चे को एक और शक्ति मिल जाती है। वो लड़का और लड़की दोनों होता है। ये बात उसके पेरेंट्स समझ जाते हैं।

5/8सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक वो लड़की होता है और शाम 6 से अगले दिन 6 तक वो लड़का होता है। ये बात जब पेरेंट्स समझते हैं तो वो अपने बच्चे का नाम रजनी रहते हैं। पेरेंट्स घर बदलकर कहीं दूर चले जाते हैं। यहां दिन में रजनी स्कूल में पढ़ाई करती और रात में पेरेंट्स बेटे रजनी को घर पर पढ़ाते।

6/8दोनों रजनी अपने इस रूप के बारे में जानते हैं और एक दूसरे से बात करने के लिए ये फोन में रिकॉर्डिंग छोड़ देते। अगले दिन जो जैसा रूप लेता वो उस रिकॉर्डिंग सुनकर अपनी बातें कहता। ऐसे ही एक दिन उनके पेरेंट्स का निधन हो जाता है। अब रजनी अकेले हो गए।

7/8दोनों दिन और रात को जॉब करने लगे। लड़की रजनी को उसके ऑफिस का कार्तिक नाम का लड़का प्यार करने लगता है। वहीं लड़का राजनी की लाइफ में भी एक लड़की संयुक्ता की एंट्री हो जाती है।

8/8कहानी में मोड़ तब आता है जब लड़का रजनी और लड़की रजनी जिन लोगों से प्यार करते हैं उन्हें धोखा होता है। दोनों के रिश्ते टूटने ही वाले होते हैं कि कार्तिक अरु संयुक्ता को सच पता चल जाता है। कहानी में आगे लड़का रजनी हमेशा के लिए गायब ही जाता है। लेकिन फिर जब लड़की रजनी बेटी को जन्म देती है। उसकी सारी शक्तियां उसके अंदर आ जाती हैं। यहां कहानी का अंत हो जाता है।
