
अगर आपको लगता है कि भारत में सिनेमा का विकास आजादी के कुछ सालों बाद होना शुरू हुआ तो आप सही हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि भारत को आजादी मिलने से पहले हमारे यहां फिल्में नहीं बनती थीं, तो आप गलत हैं। भारत के आजाद होने से पहले भी हिन्दुस्तान में फिल्में बना करती थीं और आज हम आपको ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं।

2/8दादा साहेब फाल्के के निर्देशन में बनी यह 40 मिनट की फिल्म भारत की पहली फुल लेंथ साइलेंट फिल्म थी। यह फिल्म साल 1913 में रिलीज हुई थी। यानि आजादी से बहुत वक्त पहले।

3/8यह वो पहली फिल्म थी जिसे ब्रिटिश शासन ने बैन कर दिया था। फिल्म में बड़ी समझदारी और चालाकी से महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की झलक दी गई थी। अंग्रेजों ने इसी वजह से इसे बैन कर दिया था।

4/8साल 1925 में आई इस फिल्म को 'द इंडियन साइलॉक' के नाम से भी जाना जाता है। बाबूराव पेंटर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी भारतीय गरीबों को मालदार लालाओं और उद्योगपतियों द्वारा शोषित किए जाने के बारे में थी।

5/8साल 1931 में आई इस फिल्म का नाम आपने शायद सुना हो। यह भारत की पहली बोलती फिल्म थी। इससे पहले जो फिल्में रिलीज हुईं उनमें साउंड नहीं होता था। यह फिल्म भारतीय सिनेमा जगत में एक अलग ही क्रांति लेकर आई।

6/8यह फिल्म भी साल 1931 में रिलीज हुई थी। यह मूवी 16वीं सदी के संत 'एकनाथ' पर आधारित थी। इस फिल्म के जरिए भारत में छुआछूत और एक तबके के साथ होने वाले अन्याय की बात को गंभीरता से उठाया गया था।

7/8यह फिल्म साल 1937 में आई थी। यह फिल्म इसलिए खास थी, क्योंकि यह तब पहली फिल्म थी जिसे भारत में ही कलर प्रोसेस किया गया। इस मूवी को इंपीरियल फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया था।

8/8सोहराब मोदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक बड़ी कॉमर्शियल हिट थी। इसने मेकर्स को मालामाल कर दिया था। फिल्म में उर्दू और हिंदी का कॉम्बिनेशन काफी पसंद किया गया।
