इन फिल्मों में भी हुआ था गालियों का खुलकर इस्तेमाल, देख लीं तो 'धुरंधर' हल्की लगने लगेगी

'धुरंधर' और इसके सीक्वल 'धुरंधर 2: द रिवेंज' में इस्तेमाल हुई भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहस हुई। हालांकि कहानी को हकीकत के करीब दिखाने के लिए गालियों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई ऐसी फिल्में आ चुकी हैं जिन्होंने गालियों का खुलकर इस्तेमाल किया गया था।

Puneet ParasharApr 18, 2026 06:06 pm IST
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धुरंधर से पहले इन फिल्मों में हुआ है गालियों का जमकर इस्तेमाल

आदित्य धर के निर्देशन में बनी ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म 'धुरंधर' और 'धुरंधर-2' इसमें किए गए गालियों के इस्तेमाल के चलते काफी चर्चा में रही। फिल्म देखने पहुंचे बहुत से लोगों ने इस बात पर आपत्ति भी जताई, जिसके बाद आदित्य धर ने कई सीन्स से गालियों को म्यूट भी किया। लेकि क्या आपको पता है कि इससे पहले भी कई बार ऐसी फिल्में आ चुकी हैं जिनमें धुरंधर की तुलना में कहीं ज्यादा गालियों का इस्तेमाल किया गया था।

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गैंग्स ऑफ वासेपुर

अनुराग कश्यप की इस फिल्म को बॉलीवुड में गालियों के इस्तेमाल का 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है। इसमें बिहार की देसी और देहाती गालियों को कहानी के हिसाब से इतने स्वाभाविक तरीके से पिरोया गया था कि वो फिल्म की पहचान बन गईं। पर्दे पर अपराध की दुनिया को असली रंग देने के लिए मेकर्स ने भाषा के साथ कोई समझौता नहीं किया था।

3/8

डेल्ही बेली

आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी इस डार्क कॉमेडी फिल्म ने रिलीज के वक्त अपने बोल्ड संवादों से सबको हैरान कर दिया था। यह पहली मुख्यधारा की फिल्म थी जिसमें शहरी गालियों और 'एफ-वर्ड' का इस्तेमाल इतनी बेबाकी से किया गया था। शहरी युवाओं की बातचीत को यथार्थवादी बनाने के लिए मेकर्स ने इस बोल्ड भाषा का सहारा लिया था।

4/8

ओमकारा

उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म शेक्सपियर के नाटक 'ओथेलो' का देसी रूपांतरण थी। विशाल भारद्वाज ने फिल्म के किरदारों को रस्टिक और दमदार दिखाने के लिए वहां की स्थानीय बोली और तीखी गालियों का प्रयोग किया था। फिल्म के संवाद जितने कड़वे थे, उतने ही प्रभावशाली भी साबित हुए।

5/8

बैंडिट क्वीन

फूलन देवी के जीवन पर आधारित इस फिल्म ने 90 के दशक में अपनी भाषा और सीन्स को लेकर काफी विवाद झेला था। शेखर कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेहद बेबाक और कड़वी भाषा का इस्तेमाल हुआ था, जो उस दौर के हिसाब से काफी बड़ी बात थी। फिल्म की भाषा को लेकर सेंसर बोर्ड के साथ इसकी कानूनी लड़ाई काफी चर्चित रही है।

6/8

उड़ता पंजाब

पंजाब के ड्रग संकट को दिखाने वाली इस फिल्म में किरदारों की हताशा और मजबूरी को दिखाने के लिए गालियों का खूब इस्तेमाल हुआ था। सेंसर बोर्ड के साथ कट्स को लेकर इस फिल्म की जंग ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। फिल्म के संवादों की कच्ची भाषा ने दर्शकों को पंजाब की जमीनी हकीकत से रूबरू कराया था।

7/8

सत्या

मुंबई अंडरवर्ल्ड पर बनी राम गोपाल वर्मा की यह फिल्म आज भी एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है। माफिया दुनिया की कड़वी सच्चाई और मुंबई की 'सड़क छाप' भाषा को पर्दे पर उतारने के लिए इसमें गालियों का बखूबी इस्तेमाल हुआ था। इन संवादों ने फिल्म के माफिया किरदारों को और भी खतरनाक और असली बना दिया था।

8/8

एनिमल

'धुरंधर' से ठीक पहले रिलीज हुई रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' अपने हिंसक संवादों और गालियों के लिए काफी चर्चा में रही। संदीप रेड्डी वांगा की इस फिल्म ने बड़े बजट के सिनेमा में एग्रेसिव और तीखी भाषा का एक नया ट्रेंड शुरू किया। फिल्म की तीखी आलोचना भी इसकी इसी 'वर्बल अब्यूज' और टॉक्सिक थीम की वजह से हुई थी।

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