एक ऐसा गीत जिसे गाते-गाते रोते रहे थे मोहम्मद रफी, साहिर ने लिखे बोल, रवि का था म्यूजिक

साहिर लुधियानवी की कलम से लिखे गीत जब मोहम्मद रफी के गले से ऑडियंस तक पहुंचते थे तो ऐसा लगता था जैसे कोई जादू हो गया हो। इस जोड़ी के गीत न सिर्फ दिल को सुकून पहुंचाते बल्कि सालों एक याद के तौर पर दिलों में बसे रहते। 

Usha ShrivasAug 24, 2025 12:47 pm IST
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मोहम्मद रफी

एक ऐसा ही गीत जिसे इस जोड़ी ने ऑडियंस तक पहुंचाया और आज भी जब वो गाना गानों में गूंजता है तो किसी के लिए भी आंसू रोकना मुश्किल हो जाता।

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नील कमल

हम बात कर रहे हैं 1968 में आई फिल्म नील कमल के एक खास गीत की। इस फिल्म में एक्टर राज कुमार, मनोज कुमार, बलराज साहनी और वहीदा रहमान जैसे एक्टर्स नजर आए थे।

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म्यूजिक

फिल्म का डायरेक्शन किया राम महेश्वरी ने किया था। ये उस साल की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में से एक थी। फिल्म की कहानी के अलावा म्यूजिक कंपोजर रवि का रुला देने वाला म्यूजिक था।

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मोहम्मद रफी की आवाज

रोमांटिक थ्रिलर फिल्म नील कमल का वो गाना उस से जब थिएटर में बजा तो कोई ऐसा नहीं रहा जो रोया न हो। टीवी पर देखने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। उस गाने को साहिर ने लिखा था और आवाज दी थी मोहम्मद रफी ने।

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आंसू नहीं रोक पाए थे रफी साहब

बताया जाता है जब मोहम्मद रफी ये गाना रिकॉर्ड कर रहे थे तब वो खुद कई बार रोए और पूरे गाने में उनका गला भारी रहा। उस भारी गले और रुआंसी आवाज में मोहम्मद रफी ने वो गाना गया था जिसे बोल थे ‘बाबुल की दुआएं लेती जा जा तुझको सुखी संसार मिले’।

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जज्बातों पर काबू नहीं पा सके

इस गाने को गाने वाले सिंगर, रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग और थिएटर में बैठी ऑडियंस सभी अपने जज्बातों पर काबू नहीं पा सके थे। आज भी ये गाना रुला देता है।

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विदाई गीत

इस गाने को डायरेक्टर राम महेश्वरी ने वहीदा रहमान और बलराज साहनी पर फिल्माया था।अ एक्टर्स ने एक बेटी की विदाई और पिता के दर्द को स्क्रीन पर ऐसे दिखाया जैसे कोई असल में विदा हो रहा हो।

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वहीदा रहमान

इस फिल्म में शानदार परफॉरमेंस के लिए वहीदा रहमान ने उस साल बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड जीता था।

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