
अगर आप कोरियन ड्रामा के फैन हैं, तो आपकी वॉच लिस्ट में 7.9 IMDb रेटिंग वाली ये सीरीज जरूर होनी चाहिए। ये सीरीज उन लोगों के लिए है जिन्हें थ्रिल, साइकॉलॉजिकल टच और थोड़ा फिलॉसॉफिकल ड्रामा पसंद है। इस सीरीज को आप जियोहॉस्टार पर देख सकते हैं।

2/8सीरीज 'लाइट शॉप' का सबसे बड़ा प्लस पाइंट इसका यूनिक कॉन्सेप्ट है। कहानी एक ऐसी पुरानी दुकान के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक अंधेरी गली के अंत में स्थित है। यह कोई साधारण दुकान नहीं है, बल्कि एक 'लाइट शॉप' है जहां सिर्फ इंसान नहीं, बल्कि आत्माएं (Ghosts) भी आती हैं। ये वो आत्माएं हैं जो पूरी तरह से 'दूसरी दुनिया' में नहीं गई हैं। वे या तो कोमा में हैं या उनकी कोई इच्छा अधूरी रह गई है, या वे जीवन और मृत्यु के बीच लटकी हुई हैं।

3/8पूरी सीरीज में एक अजीब सा साइलेंट है, अनसेटलिंग एटमॉस्फियर बना रहता है। डर चीखों से नहीं, खामोशी से पैदा होता है। यही स्लो, क्रीपी टोन इसे अलग बनाता है। नैरेशन सीधा नहीं है। हर एपिसोड जैसे एक पजल पीस हो। धीरे-धीरे चीजें जुड़ती हैं।

4/8Ju Ji-hoon ('Kingdom' फेम) और Park Bo-young जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपनी परफॉर्मेंस से जान फूंक दी है। इन सितारों की मौजूदगी ही सीरीज को एक अलग लेवल पर ले जाती है।

5/8इसे सिर्फ एक हॉरर या मिस्ट्री शो समझकर देखने की गलती न करें। यह सीरीज प्यार, पछतावे और अपनों को खोने के गम को बहुत खूबसूरती से दिखाती है। दुकान में बिकने वाले हर बल्ब के पीछे एक इंसान की दास्तान और उसका इमोशनल सफर छिपा है।

6/8लाइट्स के साथ बहुत अच्छे से खेला गया है। विजुअल्स ऐसे हैं कि वही ही आधी कहानी कह देते हैं। हर एपिसोड के साथ एक नई परत खुलती है, जो आपको अगला एपिसोड देखने के लिए मजबूर करती है।

7/8कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए लग सकते हैं। शुरुआत में कहानी थोड़ी कन्फ्यूजिंग लगती है। अगर आपने एक पल के लिए भी ध्यान हटाया, तो आप कन्फ्यूज हो सकते हैं कि कौन जिंदा है और कौन नहीं।

8/8जिन्हें स्लो-बर्न मिस्ट्री पसंद है, उनके लिए ये ट्रीट है। लेकिन जो तेज रफ्तार चाहते हैं, उन्हें धैर्य रखना पड़ेगा। अगर आप कुछ हटकर और दिमागी कसरत वाला ड्रामा देखना चाहते हैं जो अंत में आपको इमोशनल भी कर दे, तो ये सीरीज आपके लिए है।
