
सुपरस्टार यश ने अपनी फिल्म 'टॉक्सिक' को 19 मार्च की जगह 4 जून के दिन रिलीज करने का फैसला लिया है। उन्होंने अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा कि वे मिडल ईस्ट क्राइसिस (US Israel Iran War) की वजह से ये कठिन फैसला ले रहे हैं। अब जो लोग इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे, वे ये नहीं समझ पा रहे हैं कि सात समंदर पार के तनाव की वजह से फिल्म की रिलीज को क्यों पोस्टपोन किया गया? आइए आपको बताते हैं कि मिडिल ईस्ट क्राइसिस और 'टॉक्सिक' का क्या रिलेशन है।

2/7दुबई, सऊदी अरब और कतर जैसे देश भारतीय फिल्मों (खासकर साउथ और बॉलीवुड एक्शन) के लिए दुनिया के सबसे बड़े ओवरसीज मार्केट्स में से एक बन चुके हैं। बड़े बजट की फिल्मों (जैसे KGF 2, जवान, पठान) की कुल कमाई का 15% से 25% हिस्सा सिर्फ ओवरसीज से आता है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सिनेमाघर बंद होते हैं या दर्शक बाहर नहीं निकलते, तो फिल्म को सीधे तौर पर 100-200 करोड़ का नुकसान हो सकता है।

3/7आज की 'पैन-इंडिया' फिल्में 300 से 500 करोड़ के बजट पर बनती हैं। सिर्फ भारतीय बॉक्स ऑफिस से मुनाफा कमाना मुश्किल होता जा रहा है। यश ने अपने बयान में खुद कहा कि यह फिल्म कन्नड़ और अंग्रेजी में शूट की गई है। इसका मतलब है कि उनकी नजर केवल भारत पर नहीं, बल्कि वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर है। जब आप 'ग्लोबल सिनेमा' बनाने का दावा करते हैं, तो ग्लोबल स्टेबिलिटी आपके लिए सबसे पहली प्राथमिकता बन जाती है।

4/7पोस्टपोन करने से सिर्फ वर्ल्डवाइड ही नहीं, भातरीय बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म को फायदा मिलेगा। दरअसल, 19 मार्च को रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' के साथ क्लैश होने से बिजनेस बंटने का खतरा था। लेकिन 'टॉक्सिक' के पोस्टपोन होने के बाद अब 'धुरंधर 2' को सोलो रिलीज का मौका मिला है, जिससे दोनों फिल्मों काे घाटा कम होगा। यश अब आसानी से हिंदी ऑडियंस को अटैक्ट कर पाएंगे।

5/7जून तक मिडिल ईस्ट के हालात सुधरने की उम्मीद है, जिससे फिल्म को बड़ी 'विंडो' मिल सकती है। इसके अलावा, 4 जून के आस-पास कोई बड़ी हाइप वाली फिल्म रिलीज नहीं हो रही है।

6/7जवान (2023) ने UAE के बॉक्स ऑफिस से लगभग 9.2 मिलियन कमाए थे। पठान (2023) ने पहले पांच दिनों में मिडिल ईस्ट से 26.20 मिलियन डॉलर का बिजनेस किया था। दंगल (2016) ने खाड़ी देशों में रिकॉर्ड ओपनिंग की थी। केजीएफ: चैप्टर 2 (2022) ने UAE में 8.15 मिलियन डॉलर कमाए थे।

7/7फिल्म 'टॉक्सिक' काे पोस्टपोन करना बिजनेस डिसीजन है। यह दिखाता है कि आज का भारतीय फिल्म निर्माता सिर्फ क्रिएटिव नहीं, बल्कि एक ग्लोबल बिजनेसमैन की तरह सोच रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति सिर्फ राजनीति के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के 1000 करोड़ी क्लब के लिए भी जरूरी है।
