
90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर में बॉलीवुड संगीत जगत में कई ऐसे सिंगर्स आए, जिन्होंने अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया। इनके गाए गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। लेकिन वक्त बदलने और इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स के कारण, इनमें से कई दिग्गज गायक धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया की मुख्यधारा से दूर हो गए।

2/10साल 2004 में आई इमरान हाशमी की फिल्म ‘मर्डर’ का सुपरहिट गाना ‘भीगे होंठ तेरे’ कुणाल गांजावाला के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस एक गाने ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। इसके अलावा उन्होंने ‘चन्नावे घर आ जा वे’, ‘कोई मिल गया’ (कुछ कुछ होता है), ‘सलामे’ (धूम) और ‘मौला मौला’ (सिंघम) जैसे कई यादगार गाने गाए।

3/10अपने सुनहरे दौर में वे साल में 18 से 20 गाने तक रिकॉर्ड करते थे। हालांकि, साल 2018 के बाद से वे बड़े बैनर्स की फिल्मों से दूर हो गए। शाहरुख खान की फिल्म ‘जीरो’ का गाना ‘अन-बान’ उनका आखिरी बड़ा बॉलीवुड ट्रैक माना जाता है।

4/1090 के दशक की सबसे लोकप्रिय फीमेल प्लेबैक सिंगर्स में से एक साधना सरगम ने अपने करियर की शुरुआत 1982 की फिल्म ‘विधाता’ के गाने ‘सात सहेलियां’ से की थी। बतौर सोलो सिंगर उनका पहला गाना 1985 की फिल्म ‘रुस्तम’ का ‘दूर नहीं रहना’ था।

5/10साधना सरगम के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है—वे भारत की इकलौती ऐसी सिंगर हैं जिन्होंने हिंदी समेत 27 अलग-अलग भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए हैं। पिछले कुछ सालों से फिल्मों में उनकी सक्रियता काफी कम हो गई है। साल 2021 में आई नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘मीनाक्षी सुंदरेश्वर’ में गाया गाना उनका अब तक का आखिरी बॉलीवुड ट्रैक है।

6/10अपनी अनोखी और दर्दभरी आवाज के लिए पहचानी जाने वाली शिबानी कश्यप ने साल 2003 में आई फिल्म ‘वैसा भी होता है – पार्ट 2’ के लिए ‘सजना आ भी जा’ गाना गाया और लिखा था, जो आज भी बेहद पसंद किया जाता है। इसके बाद उन्होंने ‘जिंदा’ (2006) और ‘1971’ (2007) जैसी फिल्मों के लिए भी अपनी आवाज दी।

7/10फिल्मों में शिबानी का सफर साल 2014 की फिल्म ‘आइडेंटिटी कार्ड’ के गाने ‘सनाटा’ के बाद थम सा गया। हालांकि, शिबानी आज भी लाइव कॉन्सर्ट्स, म्यूजिक इवेंट्स और टीवी प्रोग्राम्स में लगातार परफॉर्म करती हैं।

8/1090 के दशक के स्टार सिंगर विनोद राठौड़ ने अपने करियर में 3500 से ज्यादा गाने गाए हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, बांग्ला और फारसी जैसी भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उनके गाए गाने जैसे ‘ऐसी दीवानगी’ (दीवाना) और ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ (खलनायक) आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।

9/10विनोद ने 1986 में फिल्म ‘बेदाग’ के गाने ‘मेरे दिल में है अंधेरा’ से डेब्यू किया था, लेकिन वक्त के साथ वे भी बॉलीवुड से दूर होते गए। साल 2013 की फिल्म ‘जमानत’ का गाना ‘क्या मोहब्बत है’ उनका आखिरी फिल्मी गाना माना जाता है।

10/10फिल्म ‘चांदनी’ के आइकॉनिक गाने ‘चांदनी ओ मेरी चांदनी’ से सनसनी मचाने वाले जॉली मुखर्जी अपने दौर के बेहद प्रतिभाशाली सिंगर थे। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कई ए-लिस्ट (टॉप) एक्टर्स के लिए अपनी आवाज़ दी। लेकिन साल 2013 के बाद से वे म्यूजिक इंडस्ट्री से पूरी तरह गायब हो गए। राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या 2’ का गाना ‘ताकत’ उनके करियर का आखिरी गाना था, जिसके बाद से वे लाइमलाइट से पूरी तरह दूर हैं।
