रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद भी अमिताभ बच्चन ने क्यों छोड़ा था राजनीतिक करियर, इस बड़े घोटाले में आया था नाम

हर फिल्मी सितारे की कहानी राजनीति में इतनी सफल नहीं रही। इस लिस्ट में बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का नाम भी शामिल है। बिग बी ने 'कौन बनेगा करोड़पति 17' के एक एपिसोड के दौरान राजनीति में अपने छोटे से सफर को याद किया था।

Priti KushwahaMay 09, 2026 07:37 pm IST
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आखिर क्यों रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद अमिताभ बच्चन ने छोड़ा राजनैतिक करियर?

फिल्मी सितारों का राजनीत से गहरा संबंध है। हिंदी सिनेमा से लेकर साउथ और भोजपुरी सिनेमा के कई सितारे आज अभिनेता ने राजनेता बने हैं। वहीं, तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने राजनीति के मैदान में एक तूफानी एंट्री की है।

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विजय ने राजनीति के मैदान में मारी तूफानी एंट्री

विजय की नई पार्टी तमिलाग वेट्री कड़गम (टीवीके) तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटों पर जीती है। विजय जल्द मुख्यमंत्री पद की भी शपथ ले लेंगे। विजय की जीत सिर्फ उनकी ही नहीं बल्कि उनके फैंस की भी है।

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अमिताभ ने याद किया राजनीतिक सफर

लेकिन हर फिल्मी सितारे की कहानी राजनीति में इतनी सफल नहीं रही। इस लिस्ट में बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का नाम भी शामिल है। बिग बी ने 'कौन बनेगा करोड़पति 17' के एक एपिसोड के दौरान राजनीति में अपने छोटे से सफर को याद किया था।

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1984 का लोकसभा चुनाव लड़ा

उन्होंने बताया था कि भारतीय राजनीति के सबसे ऐतिहासिक चुनावों में से एक जीतने के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने का फैसला क्यों किया। अमिताभ ने बताया कि 1984 का लोकसभा चुनाव लड़ने का उनका फैसला पूरी तरह से भावनाओं और अपने होम टाउन इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के लोगों से मिले प्यार से प्रेरित था।

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इलाहाबाद में मुझे वोट मिला और मैं इलेक्शन जीत गया

उन्होंने बताया, 'मैंने (पॉलिटिक्स) बहुत इमोशनल हालत में छोड़ी थी। मेरा जन्म स्थान इलाहाबाद था। वहां के लोग मुझे बहुत प्यार करते थे। मुझे वोट मिला और मैं इलेक्शन जीत गया। लेकिन जब मैंने वहां कुछ दिन बिताए। मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत मुश्किल काम है। आपको इस तरह देखना होगा, उस तरफ देखना होगा, उस तरफ सुनना होगा, इसका जवाब कैसे देना है, यह कैसे करना है। यह बहुत मुश्किल है।'

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पब्लिक सर्विस में बिताए दो सालों ने बदल दिया नजरिया

पॉलिटिक्स को 'बहुत मुश्किल काम' कहने के बावजूद, अमिताभ ने माना कि पब्लिक सर्विस में बिताए दो सालों ने उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने कहा, 'उस समय मेरा जो एक्सपीरियंस था, जो दो साल मैंने वहां बिताए, वो मेरे लिए बहुत कीमती है।'

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 वे अपने तरीके से इसका सम्मान करते हैं

बिग बी ने माना, 'क्योंकि भारत की असली जिंदगी हमारे अंदरूनी गांवों में बसती है। यहीं से मुझे पता चला कि वहां के लोग कैसे रहते हैं, क्या करते हैं और जब भी कोई चुनाव लड़ने आता है तो वे बहुत इज्जत देते हैं। वे अपने तरीके से इसका सम्मान करते हैं। आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा'

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1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस में शामिल हुए

बता दें कि अमिताभ बच्चन ने अपने करियर के शिखर पर राजनीति में कदम रखा। साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका चुनावी डेब्यू किसी ऐतिहासिक घटना से कम नहीं था।

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इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव बहुगुणा को दी थी टक्कर

उन्होंने इलाहाबाद सीट पर दस लाख से ज्यादा वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। वे इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने उतरे और पूर्व सीएम एच.एन. बहुगुणा को भारी अंतर से हराकर संसद पहुंच गए।

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बोफोर्स घोटाले में घसीटा गया बिग बी का नाम

लेकिन 1987 में उनका राजनीतिक सफर अचानक खत्म हो गया, जब बोफोर्स घोटाले में उनका नाम घसीटा गया। ऐसे में विरोधियों के दबाव में आकर अमिताभ ने इस्तीफा दे दिया। यह केस उनपर 25 साल चला और साल 2012 में उन्हें बरी कर दिया गया।

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राजनीति को कहा 'नरक'

उस दौरान इंडिया टुडे के साथ बातचीत में अमिताभ बच्चन ने कहा था कि काश मेरे माता-पिता के जीवित रहते हुए मेरे निर्दोष होने का पता चल पता। वहीं, 1998 में सिमी गरेवाल के मशहूर शो Rendevouz में अमिताभ आए थे। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि कई राजनेताओं ने उन्हें जान का खतरा होने की चेतावनी दी थी। उन्होंने अपने राजनैतिक कार्यकाल में झेली गई परेशानियों और जीवन को 'नरक' कहा, जबकि वह कभी राजनीति में आना भी नहीं चाहते थे।

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