बुझती हुई माचिस की तीली पर लिखा गया 1972 का सबसे पॉपुलर गीत, आनंद बक्शी को सिगरेट सुलगाने से मिले गीत के बोल

आनंद बक्शी के सबसे शानदार गीतों में से एक गीत ऐसा भी लिखा गया जिसे बरसते सावन और तेज हवाओं के बीच सिर्फ एक बुझती हुई माचिस की तीली पर लिखा गया था। आगे चलकर ये 1972 का सबसे पॉपुलर गाना बना। इससे ज्यादा रोमांटिक और दर्द भरा गाना शायद आपने पहले नहीं सुना होगा।

Usha ShrivasJul 30, 2025 10:31 am IST
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फिल्म अमर प्रेम

उन दिनों शक्ति सामंत राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को लेकर फिल्म अमर प्रेम बना रहे थे। इसी दौरान शक्ति सामंत एक पार्टी में शामिल हुए जहां उनकी मुलाकात उस समय के मशहूर गीतकार आनंद बक्शी से हुई। दोनों पहले भी साथ काम कर चुके थे और इंडस्ट्री में मशहूर थे।

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मुलाकात

पार्टी के दौरान शक्ति सामंत ने आनंद बक्शी से अपनी फिल्म अमर प्रेम के लिए एक इमोशनल गीत लिखने की बात कही। इसी दौरान गीतकार को फिल्म के उस सीन की सिचुएशन भी समझा दी गई।

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शक्ति सामंत

ये पार्टी देर रात तक चली। और जब शक्ति सामंत अपने घर के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्होंने आनंद बक्शी को भी साथ ले लिया। जब दोनों पार्टी वेन्यू से बाहर निकले तो जबरदस्त नजारा था।

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तेज बारिश का दिन

उस दिन तेज बारिश थी, तूफान और तेज हवाएं चल रही थी, आकाश में बादल गरज रहे थे, बिजली कड़क रही थी। ऐसे में शक्ति सामंत ने अपनी गाड़ी के अंदर शरण ले ली।

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तूफानी मौसम

लेकिन आनंद बक्शी अब भी पार्टी के सुरूर में डूबे थे। ऐसा मौसम देखकर उन्हें सिगरेट सुलगाने की तलब हुई। उन्होंने अपनी जेब से माचिस की डिबिया निकाली और सिगरेट फूंकने लगे।

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माचिस की डिबिया पर गाना

अब जैसे ही आनंद बक्शी माचिस जलाकर कर सिगरेट सुलगाने की कोशिश करते वैसे ही हवा और बारिश से तीली भुज जाए। ऐसा करते-करते उन्होंने आधी माचिस की डिबिया खत्म कर दी। तभी उन्हें दिमाग में ख्याल आया और वो चिल्लाए। उन्होंने गाड़ी में बैठे शक्ति सामंत से कागज और पेन देने को कहा।

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सबसे पॉपुलर गीत

इस तेज बारिश और माचिस की बुझती तीली नी अपना काम कर दिया था। आनंद बक्शी के दिमाग में उस सेड सॉन्ग की शुरुआत हो चुकी थी। उस दिन आनंद बक्शी की कलम से 1972 का सबसे पॉपुलर गाना लिखा गया। ये गाना था ‘चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए, सावन जो अग्न लगाए तो उसे कौन बुझाए’।

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अमर हो गई फिल्म अमर प्रेम और गीत

इस लिखे गीत को पंचम दा का म्यूजिक का साथ और किशोर कुमार की आवाज मिली। इस गाने ने जो कमाल किया वो कई महारथी की कलम से निकले गीत नहीं कर पाए। आज भी ये गाना सुना जाता है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने इस गाने में आग लगाने जैसा काम किया।

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