
सनातन धर्म में कलावे को एक पवित्र धागे के रूप में देखा जाता है। इसे उतारने के बाद कभी भी इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। इसे हाथ से उतारने के बाद नियम के हिसाब से विसर्जित करना चाहिए। इसके कई और नियम भी हैं जिसे शुभ माना जाता है।

2/7अगर आप अपना पुराना कलावा हटा रहे हैं तो इसे पेड़ की जड़ के आसपास मिट्टी में दबा दें। इसे शुभ और सम्मानजनक तरीका माना जाता है। आप चाहे तो पीपल, तुलसी, केले या फिर बरगद के पेड़ की जड़ के आसपास इसे दबा सकते हैं।

3/7पुराने कलावे को किसी साफ बहते हुए पानी में प्रवाहित करना भी सही नियम है। इसे नदी या फिर तलाब में भी विसर्जित कर सकते हैं। मान्यता है कि इस तरह से कलावे को हटाना शुभ होता है।

4/7अगर आपका बाहर जाना संभव नहीं है या फिर आसपास कोई नदी वगैरह नहीं है तो घर में गमले की मिट्टी में भी इसे दबा सकते हैं। इस तरह से कलावे को हटाना भी अच्छा ऑप्शन है।

5/7वास्तु मान्यता है कि कलावा बांधने या फिर पुराने को बदलने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। अगर आपको कलावा हटाना है या फिर नया पहनना है तो इसके लिए इन्हीं दिनों का चयन करें।

6/7कलावे को कभी भी कैंची से नहीं काटना चाहिए। इसे हमेशा धीरे-धीरे हाथ से ही खोलकर उतारें। इसके लिए आप दूसरों की भी मदद ले सकते हैं। तमाम लोग दांत से काटकर भी इसे खोलने की कोशिश करते हैं जोकि सही नियम नहीं है।

7/7नए कलावे को बांधते वक्त भगवान को याद करें। इस दौरान मंत्रों का जाप करना भी सही रहेगा। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
