
वट सावित्री व्रत में बरगद पूजा करते समय कई महिलाएं श्रद्धा में कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठती हैं, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

2/9यह व्रत सिर्फ उपवास का नहीं, बल्कि पति के प्रति समर्पण और सावित्री के त्याग का प्रतीक है। सावित्री ने सत्यवान को यमराज से वापस लाकर दिखाया था कि सच्ची भक्ति और पतिपरायणता से असंभव भी संभव हो सकता है। बरगद के वृक्ष की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

3/9बरगद की पूजा करते समय सबसे आम गलती है उसकी टहनियां तोड़ना। शास्त्रों में वट वृक्ष को पवित्र माना गया है। इसकी टहनी तोड़ना या उसे चोट पहुंचाना पाप माना जाता है। अगर घर पर पूजा कर रही हैं, तो छोटा पौधा लाएं या वट वृक्ष का फोटो रखकर पूजा करें। टहनी कभी ना तोड़ें।

4/9वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय कच्चा सूत या कलावा बांधा जाता है। परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में यानी दक्षिणावर्त करनी चाहिए। विपरीत दिशा में घूमना अशुभ माना जाता है और इससे व्रत में दोष लग सकता है। परिक्रमा करते समय मन में सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करें।

5/9वट सावित्री व्रत के दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। सुहागिन महिलाओं को लाल, पीला, केसरिया या गुलाबी जैसे शुभ रंग के कपड़े पहनने चाहिए। पूजा में बासी फूल, अशुद्ध जल या मैले वस्त्रों का प्रयोग वर्जित है। पूजा सामग्री पूरी तरह शुद्ध होनी चाहिए।

6/9वट सावित्री व्रत कथा सुनते या पढ़ते समय बीच में उठकर कहीं नहीं जाना चाहिए। कथा के दौरान मन भटकाना या दूसरी बातों में लग जाना व्रत के संकल्प को तोड़ देता है। पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से कथा सुनें, तभी इसका पूरा फल मिलता है।

7/9पूजा के बाद चने, फल, वस्त्र और दक्षिणा का दान अवश्य करें। बड़ों, खासकर सास का आशीर्वाद लिए बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। दान करने से पुण्य फल बढ़ता है और व्रत का प्रभाव कई गुना हो जाता है।

8/9व्रत के दिन दोपहर में सोने से बचें। इस दिन पति के साथ किसी भी प्रकार की बहस या विवाद ना करें। पूजा के समय मन को पूरी तरह शांत रखें। व्रत का पारण सूर्यास्त के बाद फल, दूध या सात्विक भोजन से करें।

9/9वट सावित्री व्रत में इन नियमों का पालन करके आप व्रत का पूरा फल प्राप्त कर सकती हैं। सच्ची श्रद्धा, शुद्धता और सही विधि से किया गया व्रत पति की लंबी उम्र, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली लेकर आता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
