
घर का मेन गेट ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा घर में आ सकती है। वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को शुद्ध और शुभ रखना बहुत जरूरी है। यहां शुभ चिह्न लगाने से घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। द्वार की साफ-सफाई और शुभ लेखन परिवार की खुशहाली से जुड़ा माना जाता है।

2/8श्री शब्द माता लक्ष्मी के लिए इस्तेमाल होता है। हिंदू धर्म में इसका अर्थ केवल धन नहीं बल्कि समृद्धि, ऐश्वर्य, ज्ञान और शुभता का प्रतीक है। जब मुख्य द्वार पर श्री अंकित किया जाता है, तो इसका भाव माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को घर आमंत्रित करना होता है। माना जाता है कि जिस घर के द्वार पर श्री लिखा होता है, वहां दरिद्रता आसानी से प्रवेश नहीं कर पाती है।

3/8सिंदूर हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। यह सिर्फ लाल रंग की वस्तु नहीं बल्कि शक्ति, मंगल और ऊर्जा का प्रतीक है। लाल रंग का संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है। सिंदूर से श्री लिखने से द्वार पर मंगलमय ऊर्जा सक्रिय होती है। यह नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने में मददगार माना जाता है और घर की सुरक्षा बढ़ाता है।

4/8घर के प्रवेश द्वार पर लाल रंग का प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा को रोकने का काम करता है। इसे सुरक्षा कवच की तरह देखा जाता है। सिंदूर की ऊर्जा द्वार को मजबूत बनाती है और अशुभ प्रभावों को अंदर आने से रोकती है। नियमित रूप से श्री लिखने से घर का वास्तु संतुलित रहता है और परिवार में शांति बनी रहती है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

5/8पहले मुख्य द्वार को अच्छी तरह साफ करें। पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर द्वार को शुद्ध करें। इससे स्थान पवित्र हो जाता है। थाली में लाल सिंदूर और अक्षत रखें। सिंदूर को थोड़े घी या चमेली के तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट आसानी से चिपकता है और देर तक बना रहता है। बता दें कि श्री की तैयारी शुद्ध मन से करनी चाहिए।

6/8सिंदूर के पेस्ट को सीधे हाथ की अनामिका उंगली से मुख्य द्वार के ऊपरी हिस्से या दोनों तरफ लिखें। अनामिका से लिखना सबसे शुभ माना जाता है। श्री शब्द साफ और सुंदर अक्षरों में अंकित करें। लिखने के बाद उस पर अक्षत चढ़ाएं। फिर इसे धूप में थोड़ी देर दिखाने से ऊर्जा बढ़ती है। मन ही मन ॐ श्रीं नमः का जाप करें।

7/8द्वार पर श्री लिखने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। घर में धन और समृद्धि आने के योग बनते हैं। वास्तु दोष कम होते हैं और नकारात्मक प्रभाव घटते हैं। परिवार में सुख-शांति बढ़ती है। नियमित अभ्यास से घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। यह छोटा-सा काम बड़े लाभ देने वाला माना जाता है।

8/8श्री लिखने के बाद उसे नियमित रूप से साफ-सुथरा रखें। धूल या मैल जमा ना होने दें। त्योहारों या शुभ अवसरों पर दोबारा अंकित करें। घी या तेल मिलाकर लिखने से रंग टिकता है। मन में श्रद्धा रखकर यह काम करें, तो फल और अच्छा मिलता है। इससे घर की ऊर्जा निरंतर शुद्ध रहती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
