
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितरों की तस्वीर के सामने गलत चीजें रखने से घर के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए पितरों की तस्वीर के आसपास कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।

2/9पितरों की तस्वीर के ठीक सामने भगवान की मूर्ति या पूजा से जुड़ी सामग्री रखने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता में देवताओं और पितरों का स्थान अलग माना गया है। इसलिए दोनों को एक ही जगह या आमने-सामने रखना उचित नहीं माना जाता। घर में भगवान का मंदिर अलग स्थान पर और पितरों की तस्वीर अलग जगह रखना ही सही माना जाता है। इससे दोनों के लिए उचित सम्मान बना रहता है।

3/9पितरों की तस्वीर के सामने कूड़ेदान, कचरा या टूटा-फूटा सामान रखना शुभ नहीं माना जाता है। वास्तु के अनुसार, पितरों का स्थान हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित होना चाहिए। टूटे कांच, खराब सामान या बेकार चीजों को तस्वीर के आसपास रखने से घर का वातावरण प्रभावित होने की मान्यता है। इसलिए तस्वीर के आसपास ऐसी चीजें जमा ना होने दें और उस जगह की नियमित सफाई करते रहें।

4/9पितरों की तस्वीर के सामने जूते-चप्पल, पुरानी छतरी या लोहे का खराब सामान रखना भी उचित नहीं माना जाता है। पूर्वजों का स्थान श्रद्धा से जुड़ा होता है, इसलिए वहां कबाड़ या इस्तेमाल में ना आने वाली चीजें रखना वास्तु के अनुसार सही नहीं है। ऐसी वस्तुओं को तस्वीर से दूर रखें और उस जगह को हमेशा साफ रखें। इससे घर में सम्मान और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

5/9पितरों की तस्वीर के ठीक सामने परिवार के जीवित सदस्यों की तस्वीर लगाने से भी बचना चाहिए। वास्तु में पितरों और जीवित लोगों की तस्वीरों के लिए अलग स्थान रखने की बात कही गई है। परिवार की ग्रुप फोटो या किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर पितरों की तस्वीर के साथ लगाने के बजाय उसके लिए अलग जगह तय करें। इससे पितरों के स्थान की गरिमा बनी रहती है।

6/9पितरों की तस्वीर के सामने खुला नमक, लाल मिर्च या मसालों के डिब्बे रखने से भी बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में इन चीजों को रसोई और भोजन से जुड़ा माना जाता है, जबकि पितरों का स्थान अलग और शांत होना चाहिए। खासकर तस्वीर के ठीक सामने या नीचे ऐसी सामग्री रखने की मनाही बताई जाती है। इसलिए मसालों को रसोई में ही व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है।

7/9वास्तु के अनुसार, एक ही पूर्वज की कई तस्वीरें घर के अलग-अलग कमरों में नहीं लगानी चाहिए। एक पूर्वज की तस्वीर के लिए एक ही स्थान तय करना उचित माना जाता है। तस्वीर को साफ दीवार पर सम्मानजनक तरीके से लगाएं और उसके आसपास अनावश्यक सामान ना रखें। पितरों की तस्वीर को बार-बार अलग-अलग जगह रखने के बजाय एक निश्चित स्थान पर रखना ही बेहतर माना जाता है।

8/9पितरों की तस्वीर के लिए रसोई और बेडरूम को उचित स्थान नहीं माना जाता है। वास्तु के अनुसार, पितरों की तस्वीर को घर के ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां शांति और साफ-सफाई बनी रहे। घर के बिल्कुल बीच यानी ब्रह्मस्थान में भी तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। पितरों के लिए अलग और सम्मानजनक स्थान तय करना शुभ माना जाता है।

9/9शाम के समय पितरों की तस्वीर के सामने दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है। अगर हर दिन दीपक जलाना संभव ना हो, तो उस स्थान पर हल्की रोशनी रखने की मान्यता है। तस्वीर के आसपास साफ-सफाई रखें और वहां जूते-चप्पल या बेकार सामान जमा ना होने दें। पितरों की तस्वीर से जुड़े ये नियम धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार अपनाते हैं। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
