
घर लेते वक्त इस बात का ख्याल जरूर रखें कि उसका मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में हो। साथ ही, घर गेट के सामने किसी अन्य व्यक्ति की सीढ़ी या गेट न बना हो। इसके अलावा, मुख्य द्वार पर पर्याप्त मात्रा में रोशनी भी जरूर आनी चाहिए। इस प्रकार घर का गेट होने से वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

2/9घर लेते समय मास्टर बेडरूम की दिशा का ख्याल भी जरूर रखना चाहिए। वास्तु के मुताबिक कमरा अगर दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो तो इसे सबसे उत्तम माना जाता है।

3/9इससे रूम में शांति का माहौल बना रहता है और घर में समृद्धि आती है। साथ ही, घर में शिफ्ट होते समय कभी भी शीशे के अपने बेड के ठीक सामने न लगाएं। ऐसा करने से वहां नकारात्मकता फैल सकती है।

4/9कभी भी घर का निर्माण करते वक्त या नए मकान में शिफ्ट होने से पहले यह जरूर देख लें कि रसोईघर किस दिशा में है। गलत स्थान पर किचन होने से अशुभ फल प्राप्त हो सकता है। वास्तु के अनुसार, किचन हमेशा आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

5/9घर में शिफ्ट होने से पहले इस बात पर जरूर गौर करें की उसमें बाथरूम व टॉयलेट किस दिशा में बना हुआ है। वास्तुशास्त्र की मानें तो बाथरूम और टॉयलेट को हमेशा उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए।

6/9इसे उत्तर-पूर्व दिशा में बनवाना सही नहीं माना गया है। साथ ही, टॉयलेट-बाथरूम को हवादार होना चाहिए और उनके दरवाजे हमेशा बंद रखने चाहिए।

7/9घर का सबसे पवित्र स्थान पूजाघर को माना गया है। ऐसे में मंदिर सही दिशा में होना सबसे महत्वपूर्ण होता है। वास्तु के अनुसार, घर में मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना चाहिए।

8/9साथ ही, इसके अंदर हल्के और शांत रंग करवाने चाहिए। ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन इस बात का ख्याल रखें की मंदिर को कभी भी बाथरूम या किचन के पास नहीं रखना चाहिए।

9/9यह खबर सामान्य जानकारियों, धर्म ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए धर्म विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।
