
शंख को विष्णु जी का प्रिय प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में शंख का बहुत ऊंचा स्थान है। पूजा-पाठ, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों में शंख की ध्वनि को शुभ और पवित्र माना जाता है।

2/8इतना ही नहीं धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। भगवान विष्णु को यह अत्यंत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में शंख का विशेष स्थान होता है। चलिए जानते हैं कि वास्तु के मुताबिक पूजा घर में इसे कहां और कितनी संख्या में रखें।

3/8वास्तु के अनुसार, शंख को घर के पूजा स्थल में रखने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य व आर्थिक लाभ होता है। कहा जाता है कि जिन घरों में शंख होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है।

4/8वास्तु शास्त्र के अनुसार, शंख रखने की सबसे शुभ दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) मानी गई है। इसे घर के मंदिर या पूजा स्थान के पास रखना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

5/8शंख को हमेशा साफ-सुथरी जगह पर रखना चाहिए। जब भी शंख बजाएं, उसके बाद उसे साफ पानी से धोकर ही वापस रखें। गंदे या धूल भरे स्थान पर रखने से नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है और घर का माहौल प्रभावित होता है।

6/8वास्तु के मुताबिक घर में दो शंख रखना शुभ माना गया हैष एक पूजा के लिए और दूसरा बजाने के लिए। पूजा वाला शंख केवल पूजन में इस्तेमाल होता है, जबकि दूसरा शंख बजाने के लिए रखा जाता है।

7/8वास्तु के अनुसार शंख को कभी भी सीधे ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। पूजा के दौरान इसे किसी साफ कपड़े या छोटे से स्टैंड पर रखा जाता है।

8/8यह खबर सामान्य जानकारियों, धर्म ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए धर्म विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।
